गरीब विधवा प्रेमिका को देखकर करोड़पति लड़का लिपटकर रो पड़ा, वजह जानकर हर कोई हैरान रह गया/hi – News

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गरीब विधवा प्रेमिका को देखकर करोड़पति लड़का लिपटकर रो पड़ा, वजह जानकर हर कोई हैरान रह गया/hi

विधवा प्रेमिका को देखकर करोड़ती लड़का लिपट कर रो पड़ा। फिर जो हुआ इंसानियत कांप गई। इसीलिए कहते हैं कि मोहब्बत चाहे कितनी भी पुरानी क्यों ना हो वो इंसान के दिल में ऐसे जड़े जमा लेती है कि वक्त चाहे जितना भी बीत जाए। उसकी हल्की सी आहट भी इंसान को अंदर तक हिला देती है। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक करोड़पति आदमी जिसने सब कुछ पाया। लेकिन खो दिया था वह एक रिश्ता जिसे दुनिया प्यार कहती है और वह उसे अपनी जिंदगी। दोस्तों राजस्थान के पवित्र शहर पुष्कर की वह सर्त सुबह सूरज की किरणें जैसे अभी-अभी धरती पर उतरी हो और बाजार की गलियों में हल्कीहल्की हवा चल

रही थी। आरव राजपूत वही करोड़ती बिजनेसमैन वही आदमी जिसके एक फैसले पर करोड़ों का खेल बदल जाता है। वो अपनी बड़ी कार से उतरा पर उसके चेहरे पर वो भारीपन था जो उसकी दौलत और शोहरत भी छिपा नहीं पा रही थी। ड्राइवर रघुवीर ने पूछा साहब होटल ले चलूं। आरव ने सिर हिलाकर कहा, नहीं जरा इसी बाजार में घूमना है और वह चल पड़ा। वैसे ही जैसे कोई आदमी अपने अतीत की तलाश में चल पड़ता है। भीड़ गहरी थी। लोग अपनी-अपनी दुनिया में गुम इंसान एक दूसरे से टकरा रहे थे। लेकिन किसी को किसी का एहसास तक नहीं। इसी भीड़ के बीच एक पल के लिए आरव के कदम जड़ हो गए। मानो किसी ने

उसके सीने के अंदर उफनते हुए दर्द को अचानक खींच कर बाहर रख दिया हो। उसकी नजर ठहर गई। हां, उस एक चेहर पर एक साधारण सी महिला, हल्के भूरे रंग की साड़ी, कंधे पर पुराना बैग, बालों में बिखरी कुछ लटें, और आंखों में एक अजीब सी खाली चुप्पी, उसके चेहरे का दुख, उसकी आंखों की थकान, उसके चलने की धीमी रफ्तार। सब कुछ बिल्कुल सब कुछ उसे उसकी खोई हुई दुनिया की याद दिला रहा था। वो फुसफुसाया ना नंदिनी रघुवीर चौका। कौन नंदिनी साहब? लेकिन आरव के लिए उस समय दुनिया का कोई मतलब नहीं था। उसकी सांसे तेज हो गई। हाथ कांपने लगे और उसने भीड़ को चीरते हुए उस महिला की तरफ कदम

बढ़ा दिए। नंदिनी ने उसे देखा। बस एक पल और फिर उसके चेहरे पर जैसे सदियों का दर्द तैर गया। वह घबराई उसके कदम लड़खड़ाए। लग रहा था जैसे वह भाग जाना चाहती हो। कहीं दूर बहुत दूर जहां कोई उसे पहचान ना सके। जहां उसका अतीत उसे पकड़ कर सवाल ना करे। पर इससे पहले कि वह मुड़कर निकल पाती। आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया। वो एक पल में टूट गया। सचमुच टूट गया। उसने जोर से नंदिनी को अपनी बाहों में भर लिया। जैसे कोई बच्चे की तरह अपने खोए हुए खिलौने को कसकर पकड़ ले। और वहीं पुष्कर की उस भीड़ भरी सड़क पर एक करोड़ती आदमी फूट-फूट कर रोने

लगा। उसकी आवाज में ऐसा दर्द था जो लोगों के दिलों को हिला दे। इंसान रुक गए। लोग देखने लगे। बातें होने लगी। कौन है यह? करोड़पति आदमी एक साधारण विधवा को ऐसे पकड़ कर क्यों रो रहा है? क्या रिश्ता है इन दोनों में? पर आरव को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। उसकी सांसे टूट रही थी। आवाज कांप रही थी। वो बार-बार सिर्फ इतना कहे जा रहा था। तुम जिंदा हो नंदिनी। तुम सच में जिंदा हो? नंदिनी के होठ कांपे। वो कहना चाहती थी बहुत कुछ। पर उसकी आवाज गले में ही अटक गई। उसने धीरे से हाथ हटाया और खुद को उससे अलग किया। उसकी आंखों में अब भी वही नमी थी। पर साथ में एक अजीब सा डर,

एक गहरी घबराहट जैसे किसी राज को छुपाए हुए बैठी हो। वो बोली, आरव, तुम यहां कैसे? और मुझे मुझे क्यों ढूंढ रहे हो? आरव ने कांपते हुए कहा, क्योंकि मैं आज भी तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। भीड़ की आवाजें, दुकानों की हलचल सब उस पल शांत हो गए जैसे दो दिल, दो दर्द, 20 साल की दूरी उस एक पल में सामने खड़ी थी। पर फिर अचानक नंदिनी की आंखों में आंसू भर आए। लेकिन उस आंसू में मोहब्बत कम और डर ज्यादा था। वो पलकें झुका कर बोली इस जन में भी हमारा रिश्ता नहीं बन सकता। तुम्हें नहीं पता मेरी जिंदगी में क्या-क्या बदल चुका है। उसका स्वर टूटा हुआ था। टूटे हुए कांच की

तरह जिसे जोड़ना नामुमकिन हो जाता है। आरव घबराया। क्या हुआ नंदिनी? तुमने इतने सालों तक मुझसे दूरी क्यों बनाई? तुम अचानक गायब क्यों हो गई थी? नंदिनी की आंखें लाल हो गई। वो पीछे हटते हुए बोली, मत पूछो आरव। मेरे पास अब भी कई ऐसे सच है जो तुम्हें तुम्हारी पूरी दुनिया को हिला देंगे और वह मुड़कर चल दी। धीरे-धीरे जैसे कोई परछाई हो जो दिन के उजाले में भी दिखाई देती है। लेकिन हाथ बढ़ाऊं तो गायब हो जाती है। आरव वही खड़ा रह गया। ठहरा हुआ टूटा हुआ। एक सवाल के साथ आखिर नंदिनी किस सच को छुपा रही है? आरव की आंखें नम होने लगी। क्योंकि नंदिनी का यह चेहरा

उसके दिल में दबी हुई दास्तान को फिर से जगा गया। वह समय जैसे पीछे मुड़ गया। जयपुर के महारानी कॉलेज के वो दिन जहां पहली बार उसने नंदिनी को देखा था। वो कोई फिल्मी हीरोइन नहीं थी। कोई बड़ी हवेली की बेटी नहीं थी। नई मेकअप से सजी लड़की पर उसकी मासूम मुस्कान और उसकी आंखों की चमक अलग ही दुनिया पैदा कर देती थी। आरव तब भी अमीर था। लेकिन नजरों का ठहराव सिर्फ नंदिनी पर होता था। वह कहती थी तुम्हें ना जाने क्या हो जाता है मुझे देखते ही। और आरव हंसकर कहता मुझे बस एक ही बीमारी है। तुम्हारी उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार के सबसे खूबसूरत रूप में बदल गई थी। रघुवीर

जो बचपन से आरव का साथी था। मजाक में कहता साहब दीदी को तो आपसे बचना मुश्किल है और दोनों हंस पड़ते आरव बार-बार एक ही बात कहता नंदिनी हम साथ रहेंगे तुम्हारा हर दर्द मैं बांटूंगा नंदिनी उसे भरोसे से देखती पर उसकी आंखों में हमेशा थोड़ी सी बेचैनी रहती क्योंकि उसका घर एक जंग का मैदान था पिता शराब में डूबे रहते मां बीमार घर में हर रात लड़ाई भोजन से ज्यादा ताने और अपमान परोसे जाते थे। नंदिनी उन सबके बीच खुद को मजबूत दिखाती लेकिन आरव के सामने उसकी आंखें कई बार कह उठती। काश मैं इस घर से भाग पाती। आरव वादा करता बस कुछ साल मैं सब संभाल

लूंगा। तुम मेरे साथ रहोगी और फिर एक दिन जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया जिसने सब कुछ तोड़ दिया। वो रात आज भी आरव के दिल में जलते कोयले की तरह चुभती है। नंदिनी अपने कमरे में बैठी रो रही थी। बहुत बड़ा झगड़ा हुआ था घर में। कोई रिश्तेदार आया था। उसने खुलेआम कह दिया लड़की हाथ से निकल रही है। इसे अभी के अभी शादी कर दो नहीं तो बदनामी हो जाएगी। पिता ने उसी रात उसे कमरे में बंद कर दिया। मां रोती रह गई पर करने को कुछ नहीं था। नंदिनी पूरी रात अपने कमरे में बैठी रही। दीवार से सिर टिका कर सिर्फ एक ही नाम पुकारती रही। आरव आरव लेकिन सुबह वो कमरा खाली था। फोन बंद

सामान गायब और घरवालों ने किसी को नहीं बताया कि नंदिनी कहां गई? आरव ने पागलों की तरह ढूंढा। हॉस्टल, बस अड्डा, रेलवे स्टेशन, हर जगह वह हर जगह पूछता। एक लड़की हल्की मुस्कान वाली। क्या आपने उसे देखा? पर नंदिनी कहीं नहीं मिली। और फिर एक हफ्ते बाद। एक रिश्तेदार ने सिर्फ दो शब्द कहे। शादी हो गई उसकी। इन दो शब्दों ने आरव के पूरे अस्तित्व को तोड़ दिया। कभी रोया, कभी चीखा, कभी खुद को ही कोसता रहा। किस्मत ने हमसे ऐसा क्यों किया? लेकिन नंदिनी की जिंदगी तो उससे भी भयानक हो चुकी थी। जिस आदमी से उसकी जबरन शादी कराई गई। वो शराबी, हिंसक और वैशी था। रोज

पीटना, रोज गालियां देना, रोज शक करना। यही नंदिनी की नई दुनिया बन गई थी। पर नंदिनी ने कभी आरव को ढूंढने की कोशिश नहीं की क्योंकि उसे लगता था कि वह वापस गई तो आरव की जिंदगी भी बर्बाद हो जाएगी। उसने खुद को उस नरक में झोंक दिया। कई बार चाहा सब खत्म कर दे लेकिन मां का चेहरा उसे रोक लेता था। दिन बीतते गए और एक रात उस शराबी पति ने नशे में गाड़ी चलाई और खुद को खत्म कर बैठा। नंदिनी विधवा बन गई। उस उम्र में जब लड़कियां अपने भविष्य के सपने देखती है। वो एक चुप्पी में बदल गई थी। उसने अपने अतीत को अपने साथ ही दफना दिया। और आज सालों बाद आरव को विधवा के

रूप में मिली थी नंदिनी। जिसके लिए उसने अपनी जिंदगी के सबसे पवित्र सपने देखे थे। आज फिर उसकी मुट्ठियों में से रेत की तरह फिसल गई थी और आरव उसी जगह पत्थर सा खड़ा रह गया था। लेकिन इस बार दुख कम था और सवाल ज्यादा। आखिर नंदिनी किस सच को छुपा रही है? खैर, नंदिनी के भीड़ में खो जाने के बाद आरव होटल लौट आया। लेकिन कमरे में फैली खामोशी। उसके भीतर का तूफान और तेज कर रही थी। वह खिड़की के पास खड़ा रहा। पुष्कर की हल्की रोशनी को देखता हुआ। जहां कहीं ना कहीं उसकी नंदिनी भटकती छुपती या किसी डर से कांपती होगी। उसने अपने आप से

कहा, मैंने उसे खोया नहीं है। वह अभी भी यही है। बस मुझे उसे ढूंढना है। अगले दिन उसने रघुवीर को भेजकर पुरानी गलियों, मंदिरों, घाटों और छोटे मोहल्लों में पूछताछ करवाई। हर जगह बस एक ही जवाब मिलता। कई विधवा महिलाएं रहती है साहब। कौन सी वाली खोज रहे हो? लेकिन नंदिनी जैसी कोई नहीं मिली जैसे वह हवा में घुल गई हो। दोपहर बीतते बीतते आरव को पुष्कर के एक गरीब मोहल्ले का पता मिला। जहां कुछ विधवा महिलाएं सिलाई एक ढाई करके गुजरस करती थी। वो वहां पहुंचा। संकीर्ण गली टूटे घर छतों पर सूखती चुनरिया और दरवाजों से झांकती आंखें। एक बूढ़ी औरत ने सावधानी

से कहा। साहब किसे ढूंढ रहे हैं? आरव ने धीमी आवाज में पूछा। यहां कोई नंदिनी रहती है? वृद्धा की आंखें कुछ पल के लिए गंभीर हो गई। फिर बोली, रहती तो थी पर अब बहुत कम घर से निकलती है। बीमारी ने बुरी तरह जकड़ रखा है उसे। आरव का दिल धक से रह गया। बीमारी कैसी बीमारी? वृद्धा ने लंबी सांस ली। जिस दुनिया से आप आते हैं ना साहब। वहां की औरत अगर रो दे तो लोग संभाल लेते हैं। लेकिन गरीबी में रोने वाली औरत और भी गहरे गड्ढे में गिरती जाती है। नंदिनी बहुत कुछ झेल चुकी है। बहुत कुछ। आरव के पैरों से जमीन खिसकने लगी। उसने तुरंत पूछा। मैं उससे मिल सकता हूं।

वृद्धा बोली, मिल तो सकते हो। पर यकीन मानो। वह आपको देखकर डर जाएगी क्योंकि वह किसी अमीर आदमी से दूर-दूर ही रहना चाहती है। आरव ने खुद को संभाला। मैं उससे सिर्फ बात करूंगा। उसकी मदद करना चाहता हूं। वृद्धा हंसी पर हंसी में दर्द था। साहब मदद सबसे ज्यादा उसी को मिलती है जो किसी को बताना नहीं चाहती कि उसे मदद की जरूरत है। वो सामने वाले जजर दरवाजे की ओर इशारा करके बोली। वही सामने कमरा नंबर चार नंदिनी वही है। आरव कुछ पल वही खड़ा रहा। सालों की दूरी अधूरी मोहब्बत और नंदिनी की टूटी हुई आवाज सब कुछ एक साथ उसके दिल पर गिरने लगा। धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए वो

उस दरवाजे तक पहुंचा। अंदर से सिलाई मशीन की धीमी आवाज आ रही थी। शायद नंदिनी अपनी दुनिया को टूटने से रोकने की कोशिश कर रही थी। आरव का हाथ कापा पर उसने दरवाजा खटखटाया। अंदर से आवाज आई। कौन? उस आवाज में थकान थी। दर्द था और एक अजीब सी सावधानी भी। आरव ने खुद को संभालते हुए कहा। मैं आरव अंदर अचानक खामोशी छा गई। सिलाई मशीन की आवाज रुक गई। फिर धीमे कदमों की आहट। दरवाजा थोड़ा सा खुला और नंदिनी ने दरवाजे के छोटे से अंतराल में अपनी झिझकी हुई आंखें दिखाई। उसने दरवाजा पूरा नहीं खोला। सिर्फ इतना कि आरव को देख सके। तुम यहां क्यों आए हो? आरव, आरव की

आंखें नंदिनी को देखकर नम हो गई। और वो बोला क्योंकि तुम मेरी नंदिनी हो। और तुम्हें इस हालत में अकेला देखकर मैं खुद को माफ नहीं कर पाऊंगा। नंदिनी ने धीरे से सिर हिलाया। नहीं आरव मैं तुम्हारी नहीं हूं। किस्मत ने मुझे वहां से उठाकर किसी और अंधेरे में फेंक दिया है। जहां से लौटना इतना आसान नहीं है। उसकी आवाज टूट रही थी। आरव ने कहा, तुम मुझे बताओ। क्या हुआ? किस बात से तुम इतनी डरी हुई हो? नंदिनी की आंखें भर आई। वह कांपते हुए बोली, डर सिर्फ मेरे लिए नहीं है। आरव मेरी जिंदगी में कोई है जो अगर मुझे तुम्हारे साथ देख ले तो तुम भी बर्बाद हो

जाओगे। आरव सिहर गया। कौन है वो? नंदिनी ने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया। अंदर से उसकी धीमी आवाज आई। कृपया चले जाओ आरव। कुछ सच ऐसे होते हैं जो इंसानियत को हिला देते हैं और मैं नहीं चाहती कि तुम उस सच में फंस जाओ और वह रो पड़ी। उसके सिसकने की आवाज लकड़ी के दरवाजे के पीछे से छुरी की तरह आरव के दिल में उतर रही थी। कुछ पल बाद कमरे में बिल्कुल खामोशी छा गई। जैसे नंदिनी ने अपने आंसुओं को वापस भीतर छिपा लिया हो। आरव दरवाजे पर हाथ रखकर फुसफुसाया। नंदिनी मैं कल फिर आऊंगा। जब तक तुम मुझे सच नहीं बताती। मैं यहां से नहीं जाऊंगा। वो मुड़ा लेकिन उसके मन में

एक ही सवाल बार-बार उठ रहा था। कौन है वो शख्स? जिससे नंदिनी इतनी डरी हुई है। भारी मन से आरव होटल पहुंचा। पूरी रात बीत गई। लेकिन आरव की आंख नहीं लगी। पूरी रात उसके मन में सिर्फ एक चेहरा घूम रहा था। नंदिनी का सुबह होते ही वह फिर उसी तंग मोहल्ले की ओर चला पड़ा। गली आज भी उतनी ही शांत थी। दीवारों पर उखड़ा हुआ रंग। छतों पर फैला धूल का पर्दा और हवा में एक अजीब सी थकान। आरव ने दरवाजा खटखटाया। अंदर से हल्की आहट आई। फिर खामोशी। कुछ सेकंड बाद दरवाजा थोड़ा सा खुला। नंदिनी सामने थी। चेहरा थका हुआ। आंखें सूझी हुई मानो रात

भर आंसू पोंछती रही हो तुम फिर क्यों आए हो आरव उसका स्वर थका हुआ था लेकिन शब्दों में दबा हुआ डर साफ सुनाई दे रहा था आरव ने शांत आवाज में कहा तुमसे बात किए बिना मैं वापस नहीं जा सकता नंदिनी ने कमरे की ओर देखा फिर बाहर की गली की तरफ जैसे कोई देख रहा हो यहां खड़े मत रहो वो धीमी आवाज में बोली कोई देख लेगा। वह दरवाजे के पीछे हट गई और आरव चुपचाप अंदर चला गया। कमरा छोटा था। एक कोने में पुराना सिलाई मशीन। दूसरे में कुछ दवाइयां और गर्म पानी की बोतल। सब कुछ एक ऐसे जीवन की कहानी कह रहा था। जिसे किसी ने कभी संभालने की कोशिश

नहीं की। नंदिनी ने बिना उसे देखे कहा। मैंने कहा था आरव। मुझसे दूर रहो। आरव उसके सामने आकर खड़ा हो गया। क्यों? तुम मुझसे किस बात से डर रही हो? नंदिनी ने गहरी सांस ली। उसकी आंखों में थकान से ज्यादा छिपाने की कोशिश थी। मेरी जिंदगी बहुत बदल चुकी है। वो बोली, तुम्हारे आने से चीजें और मुश्किल हो जाएंगी। आरव ने पूछा, किसके लिए? तुम्हारे लिए या मेरे लिए? नंदिनी ने पहली बार उसकी आंखों में देखा। उस नजर में इतनी चुप्पी थी कि आरव का दिल कांप उठा दोनों के लिए। वह बोली आरव ने धीरे से कहा मैं किसी परेशानी से नहीं डरता। बस इतना जानना चाहता हूं। तुम

किससे बच रही हो? नंदिनी कुछ पल खामोश रही। फिर बोली, “मेरे पति की मौत ने मुझे आजाद नहीं किया।” आरव, उस मौत की वजह ने मुझे कैद कर दिया। आरव चौंक गया। क्या मतलब? नंदिनी ने कुर्सी पर बैठते हुए कहा, मेरे पति के पीछे कुछ ऐसे लोग थे जो पैसे से नहीं गुस्से से चलते हैं। वो जो चाहते हैं उसे पाने के लिए किसी की जान ले लेना। उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं। आरव धीमे स्वर में बोला। क्या वे लोग तुम्हें खोज रहे हैं? नंदिनी की आंखें झुक गई। हां। वो बोली और मैं उनसे जितना दूर भागती हूं। वे उतना ही करीब आ जाते हैं। आरव ने पूछा, लेकिन तुमने पुलिस में क्यों नहीं? नंदिनी

ने बीच में ही रोक दिया। यह मामला पुलिस की पकड़ से बाहर है। कुछ ताकतें कानून से नहीं डरती और मैं किसी को खतरे में नहीं डाल सकती। खासकर तुम्हें आरव के चेहरे पर दर्द उतर आया। मैं खतरा नहीं तुम्हारा सहारा बनना चाहता हूं। नंदिनी ने सिर हिलाया। तुम समझ नहीं रहे अगर उन्होंने देख लिया कि मैं किसी अमीर आदमी से मिली हूं तो वे सोचेंगे कि मैं उनके खिलाफ सहारा ढूंढ रही हूं। उसने कांपते हुए कहा और फिर निशाना सिर्फ मैं नहीं रहूंगी। तुम भी बन जाओगे। आरव ने गुस्से और दर्द के बीच कहा। क्या तुम्हें लगता है मैं अपनी जान से इतना प्यार करता हूं कि तुम्हें

अकेला छोड़ दूं? नंदिनी की आंखें भर आई। मुझे डर तुम्हारी जान का नहीं। तुम्हारी इज्जत का है। उन लोगों का नाम जुड़ते ही जिंदगी का हर रास्ता गंदा हो जाता है। और मैं नहीं चाहती कि तुम्हारा नाम मेरे अतीत की गंदगी में खींच जाए। आरव कुछ पल उसे देखता रहा। एक ऐसी औरत जिसने प्यार के लिए नहीं डर के लिए नहीं बल्कि उसकी सुरक्षा के लिए अपने दिल को पत्थर बना लिया था। धीरे से उसने पूछा आखिर वो है कौन? नंदिनी ने होंठ भी लिए। फिर धीमी आवाज में बोली वे लोग जो मेरे पति के भी दुश्मन थे। और अब मेरी सांसों के भी मालिक बने हुए हैं।

आरव आगे झुक कर बोला नाम बताओ। नंदिनी ने कांपते हुए फुसफुसाया। जिस आदमी की वजह से मैं आज भी जिंदा हूं और उसी की वजह से कभी भी मर सकती हूं। वो अब मेरी जिंदगी में वापस आ चुका है। उसका चेहरा डर से सफेद पड़ गया और आरव पहली बार समझ गया कि यह कहानी सिर्फ मोहब्बत की नहीं। जिंदगी और मौत की लड़ाई बन चुकी है। लेकिन इस बार आरव पीछे हटने वाला नहीं था। वह धीरे से नंदिनी के करीब जाकर बोला, “अगर तुम्हारी जिंदगी किसी और के हाथ में कैद है, तो अब उसे आजाद कराने की जिम्मेदारी मेरी है। नंदिनी रो पड़ी। तुम नहीं जानते आरव। यह लोग सिर्फ धमकी नहीं

देते। जान ले लेते हैं। मेरे पति की मौत। हादसा नहीं थी। आरव ने उसके कांपते हुए हाथ अपने हाथों में लेकर कहा। डर को जितनी देर तक बाहर बंद करोगी वह उतनी ही तेजी से अंदर बढ़ेगा। अब इसे खत्म करने का वक्त है और उसी शाम आरव सीधे शहर के सबसे बड़े पुलिस अफसर से मिला। उसने कोई कहानी नहीं घुमाई। सीधे कहा सर एक निर्दोष औरत की जान पर बनी है और मैं उसके पीछे खड़े हर हैवान को कानून तक पहुंचाए बिना नहीं रहूंगा। पुलिस पहले तो हैरान हुई। क्योंकि जिन लोगों का नाम सामने आया वे वह लोग थे जिनका आतंक सालों से शहर की परछाइयों में चलता आया था। लेकिन आरव ने सबूत जुटाए।

नंदिनी के पति के पुराने कॉल रिकॉर्ड, उसके लेनदेन और उन लोगों के खिलाफ किए गए पुराने शिकायतों की फाइलें फिर से खुलवाई। और रातोंरात पुलिस की एक टीम उन दबंगों तक पहुंच गई जो खुद को कानून से ऊपर समझते थे। वे पहली बार हथकड़ियों में थे। जब यह खबर नंदिनी तक पहुंची। उसका शरीर ढह गया जैसे किसी ने वर्षों पुरानी बेड़ियां खोल दी हो। वो फूट कर नहीं रोई। बस चुपचाप बैठकर बोली, आरव, तुमने मेरी जिंदगी लौटा दी। आरव ने उसकी आंखों में गहराई से देखा। तुम्हारी जिंदगी कभी गई नहीं थी। नंदिनी, सिर्फ तुम अकेली लड़ती रही। अब साथ हूं।

तो डर कैसी चीज? दूसरे ही दिन आरव ने अपने माता-पिता से सब कुछ बताया। मां-पिता पहले चौंक गए। एक विधवा इतने खतरनाक माहौल में रही लड़की लोग क्या कहेंगे? लेकिन आरव की आंखों में वो सच्चा प्यार देखकर उनके सारे सवाल धीरे-धीरे घुलने लगे। वो बोला, “मां मैं दुनिया की नहीं।” अपनी किस्मत की चुन रहा हूं। और मेरी किस्मत नंदिनी है। पिता ने गहरी सांस ली। लोग कितनी भी बातें करें पर बेटे का दर्द बाप समझता है। अगर यही तेरी खुशी है तो हमें क्या हक है रोकने का? मां की आंखें नम हो गई। चलो नंदिनी को घर ले आओ। बहुत सह लिया उसने। उसी शाम आरव खुद पुश

कर गया। नंदिनी अपने छोटे अंधेरे कमरे में सिलाई मशीन के पास बैठी थी। जैसे जिंदगी को जोड़ती हुई एक-एक टांका लगा रही हो। आरव ने दरवाजा खोला। अंदर आया और बिना कुछ कहे उसके सामने घुटनों पर बैठ गया। नंदिनी घबरा गई। ये क्या कर रहे हो? आरव ने गहरी आवाज में कहा। वर्षों पहले तुमने मुझे खो दिया था। लेकिन अब मैं तुम्हें दुनिया के किसी डर, किसी गंदगी, किसी अतीत के हवाले नहीं करूंगा। नंदिनी क्या तुम मेरी जिंदगी बनकर मेरे साथ चलोगी? नंदिनी की सांस रुकी। आंसू गिरे और वह बस इतना कह पाई। मैं मैं उस लायक हूं। आरव ने उसका चेहरा

उठाया। तुम ही लायक हो। कुछ दिनों बाद छोटे से मंदिर में आरव और नंदिनी की शादी हो गई। रघुवीर, आरव के माता-पिता और मोहल्ले की वे तमाम विधवा महिलाएं जिनके दर्द को नंदिनी चुपचाप बांटती थी। सब गवाह बने। उस दिन पहली बार नंदिनी ने किसी के आंचल में सुकून की नींद ली। सालों बाद बिना डर के और आरव ने महसूस किया। मोहब्बत तब पूरी होती है जब वो किसी को गिरने से रोक ले और फिर से जीना सिखा दे। दोनों की कहानी वही पूरी नहीं हुई। वहीं से शुरू हुई एक नए विश्वास, नई इज्जत और नई जिंदगी के साथ। दोस्तों, सच्ची मोहब्बत वही है जो अतीत नहीं पूछती। बस टूटे हुए इंसान का

हाथ पकड़ कर उसका भविष्य बन जाती है। इंसानियत वही जिंदा रहती है। जहां किसी की कमजोरी देखकर लोग दूर नहीं भागते। बल्कि ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं। लेकिन अगर आपके सामने किसी का दर्द और समाज की सोच दो रास्ते हो तो आप किसे चुनेंगे? कमेंट करके जरूर बताइए और अगर यह कहानी आपके दिल को छू गई हो तो वीडियो को लाइक करें और हमारे चैनल स्टोरी बाय AK को सब्सक्राइब जरूर करें। क्योंकि यहां हर कहानी सिर्फ इश्क नहीं। इंसानियत से शुरू होती है। मिलते हैं अगली वीडियो में। जय हिंद।

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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