बिन बुलाए मेहमान: जब दो पोते-पोतियां घर में “बुल” बन जाते हैं/hi – News

बिन बुलाए मेहमान: जब दो पोते-पोतियां घर में “...

बिन बुलाए मेहमान: जब दो पोते-पोतियां घर में “बुल” बन जाते हैं/hi

आपको पता है नितीश और रोहित दोनों के मार्क्स बहुत कम आए इस बार। बहुत मुश्किल से पास होकर 10th क्लास में जा रहा है। आपको उसकी कोई चिंता विनंता है कि नहीं? अरे यार मैं काम करूं कि सबकी चिंता करता बैठूं। अरे लेकिन बच्चे मेरे ही तो नहीं है ना। पैदा तो आपने भी किया है। जिम्मेदारी तो आपकी भी है। तो उठाइए जिम्मेदारी। तो क्या चाहती हो? काम वाम छोड़ के बैठ जाऊं घर पे। आप घर पे बैठेंगे तो कमाएगा कौन? हां ये सही है। कमाने भी मैं जाऊं। बच्चा भी मैं संभाल हूं। तो सब कुछ मैं ही करूं। अरे कम से कम बच्चे के फ्यूचर के बारे में

तो सोचिए कुछ। 10थ में फेल हो गया तो मुंह दिखाने लायक नहीं बचेंगे। अरे तो ठीक है ना सोचता हूं कुछ। थोड़ा वक्त दो। इतना वक्त नहीं है। मैं सोच रही हूं अपने भैया भाभी के पास दोनों को भेज दूं। वहां शहर में अच्छे से पढ़ाई हो जाएगी। अरे उन लोगों से पूछ भी लो वो लोग जाना चाहते हैं कि नहीं। उन लोगों के चाहने ना चाहने से क्या होगा? जो जरूरी है वो तो करना ही पड़ेगा। उन लोगों को मैं मना लूंगी। प्लान कैसा है वो बताइए आप। अगर तुम्हारे भाई को ऐतराज ना हो तो ठीक है भेज दो। अब मैं क्या ही बताऊं। तो ठीक है। मैंने भैया से बात कर ली है।

हम कल सुबह ही शहर के लिए निकल जाएंगे। बच्चों का कोचिंग में एडमिशन भी कल ही करवा देंगे। तो कल तो मुझे छुट्टी लेनी पड़ेगी। हां वो तो लेनी पड़ेगी ना। इतनी जिम्मेदारी तो लीजिए कम से कम। ठीक है। ठीक है मैडम। ठीक है। अगले दिन हरीश और सुषमा अपने दोनों बच्चे नितीश और रोहित के साथ निकल जाते हैं और फिर लवली और ललित के घर पहुंचते हैं। आओ आओ हम लोग कल से तुम लोगों का ही इंतजार कर रहे थे। आओ अरे भाभी क्या बताऊं। इन दोनों के एडमिशन में इतना वक्त लग गया। पूछिए मत। अभी भी कुछ फॉर्मेलिटीज बची है। अब ये दोनों ही जाके देख लेंगे वो सब।

अरे तो आपको बोलना चाहिए था ना कि हमने इतना वेट किया है। अब इसके बाद पूरा काम तो करो। अरे बोला ललित लेकिन वो लोग कहां ज्यादा सुनते हैं? खैर तुम सुनाओ तुम कैसे हो? मैं तो ठीक हूं जीजा जी। अब बस अमन के भी बोर्ड्स हैं अबकी बार इसलिए थोड़ा डर लग रहा है उसके लिए। मैंने भी कोचिंग में एडमिशन करवा दिया है। अब तीनों भाई साथ में ही जाएंगे। भैया इसीलिए तो मैं भी नितीश और रोहित को यहां ले आई। कि तीनों भाई साथ मिलकर पढ़ेंगे तैयारी करेंगे। ठीक किया दीदी। मैं आपसे कहने भी वाला था लेकिन कह नहीं पाया। खैर आप ही बोल दी तो अब जो भी अच्छा है। चलिए अब आप लोग भी थक

गए होंगे क्यों? थके तो बहुत है। तो जाइए हाथ मुंह धो लीजिए। मैं चाय नाश्ता लेकर आती हूं। भाभी वैसे हम कुछ देर में निकल जाएंगे तो ज्यादा कुछ मत करिएगा। आज ही निकल जाओगे तुम लोग। हां भाभी। अरे नहीं सुषमा इतनी जल्दी भी क्या है। चली जाना बाद में। अभी तो रुक जाओ आराम से जाना। नहीं भैया घर पे बहुत काम है। सब ऐसे ही छोड़ कर आ गई हूं। अरे बाद में कर लीजिएगा ना। अरे नहीं नहीं घर पर तो जाना ही पड़ेगा। आजकल चोरियां भी बहुत होने लगी है। तो घर ऐसे खाली नहीं छोड़ सकते। अरे तो चाबी किसी को दे देते एक दिन के लिए वो देख लेते। अरे छोड़ो ना। हम फिर कभी आते हैं टाइम

निकाल के। वैसे भी अब तो आते जाते रहेंगे। मेरे दोनों अनमोल रतन यहीं पर तो है। ये भी है वैसे। चलिए ठीक है। अब काम की बात है इसलिए जाने दे रहे हैं। लेकिन अगली बार आइएगा तो टाइम लेकर आइएगा। अच्छा अभी चाय-वाई तो पी लो। हां हां चाय तो पिएंगे ही। चलो फिर सुषमा और हरीश चाय नाश्ता करके अपने घर चले जाते हैं। नितीश और रोहित अब अपने मामा-मामी के साथ रहने लगते हैं। अमन बेटा चलो खाना खा लो। आ रहा हूं मम्मी बस थोड़ा सा काम और बचा है। करके आता हूं। जल्दी आओ बेटा नहीं तो खाना ठंडा हो जाएगा। नितेश और रोहित तुम लोग भी आ जाओ। मम्मी मैं अभी नहीं खाऊंगा। मैं 2 घंटे

बाद खाऊंगा। मैं भी अभी पढ़ने बैठा हूं। 2 घंटे बाद उठकर खाऊंगा। बेटा खाना ठंडा हो जाएगा। आकर खा लो। एक काम पूरा हो जाए ना। मम्मी अभी मन नहीं है। मैं बाद में गरम करके खा लूंगा। बेटा बाद में फिर गम करना पड़ेगा और फालतू का गैस भी खर्चा होगा। लेकिन मामी अभी मन नहीं है। अरे मन हो जाएगा। आओ मेरे साथ। चलो बहुत टेस्टी खाना बनाया है तुम लोगों के लिए। ओफो मामी तो पीछे ही पड़ गई है। अब इनके गैस बचाने के चक्कर में मुझे बेमन खाना पड़ेगा। क्या मुसीबत है। चलो जल्दी आओ बेटा। मैं कब तक खाना लगाती हूं। भाई रुक जा ना नहीं जाते हैं। नहीं जाएंगे

तो मामी खुद ही भूल जाएंगी। अरे अभी आके फिर बोलने लगी तो आ जाओ बेटा खाना लग गया है। चल अब चलना ही पड़ेगा नहीं तो यह छोड़ेंगी नहीं हम लोगों को। हम चलना तो पड़ेगा। रोहित और नितीश को खाना खाने जाना पड़ता है। खाने के बाद रोहित और नितीश अमन के साथ एक कमरे में बैठकर पढ़ रहे होते हैं। तभी वहां मामी आती है। ये ले अमन तुझे गुलाब जामुन खाने का मन था ना खाने के बाद तो यह ले खा ले। आखिरी पीस बचा है। मम्मी मुझे भी चाहिए था और मुझे भी। लेकिन बेटा अब तो खत्म हो गया। और वैसे भी तुम लोगों ने अपना हिस्सा तो खाया है ना पहले। उस

समय अमन ने नहीं खाया था। तो उसका हिस्सा बचा था वही दे रही हूं अभी। कोई बात नहीं अगर तुम लोगों को खाना है तो तुम लोग खा सकते हो थोड़ा-थोड़ा। नहीं नहीं खा लो तुम। हमने सोचा और होगा तो हम खा लेंगे। हां मुझे भी नहीं पता था कि हिस्सा लगता है। अरे वो तो खाया नहीं था ना अमन ने इसलिए उसे दे दिया। तुम तीनों भाई मिलके खा लो। कोई दिक्कत थोड़ी ना है। नहीं मामी ठीक है। अच्छा चलो अब मैं सोने जा रही हूं। तुम लोगों को कोई जरूरत हो तो बता देना। ठीक है। ठीक है मां। मैं भी अब अपने कमरे में जा रहा हूं। वहीं जाके पढूंगा। चल फिर मैं अभी चलता हूं। अरे

कहां जा रहे हो? बैठो ना यहीं पे। नहीं भाई तुम खाओ। हम चलते हैं। पढ़ते-पढ़ते सो जाएंगे। चलो ठीक है। नितीश और रोहित अपने कमरे में आ जाते हैं। तू यहां क्यों आ गया? अरे तो क्या उसे खाता हुआ देखूं? जब हमें मिला नहीं तो आ गया यहां पे। कम से कम खाने का मन तो नहीं करेगा। आ मुझे लगा ये। वैसे अच्छा तो मुझे भी नहीं लगा। इसलिए मैं भी तेरे साथ ही आ गया। चलो अभी यहीं बैठ के पढ़ लेते हैं। मुझे मामी का बिहेवियर समझ में नहीं आ रहा। ऐसा लगता है कि वो थोड़ी कंजूस है। होंगी। खैर अभी पढ़ लेते हैं। बाद में देखेंगे यह सब। हां भाई

यहां पढ़ने आए हैं। चल पढ़ लेते हैं। वैसे भी सुबह कोचिंग के लिए निकलना है। अगले दिन रोहित और नितीश कोचिंग से आते हैं। आ गए बेटा तुम लोग। आओ आओ। हां मम्मी आ गए। आओ बेटा चेंज कर लो। उसके बाद खाना खा लो। अमन को भी दे दिया है खाना। अभी खाना गरम है तो गरम-गरम खा लो वरना बाद में ठंडा खाना हो जाएगा। ठीक है मम्मी हम ठंडा खाना ही खा लेंगे। अरे बेटा तो खा लो ना अभी। अभी मन नहीं है मम्मी। हम चलो ठीक है। नितीश और रोहित कोई बात समझती नहीं है। बोलती हूं कि जब खाना गरम है तो खा लो तो वो लोग खाते ही नहीं। अच्छा तो अब इसमें मैं क्या करूं?

अरे तो बताओ तुम कि मैं क्या करूं? अभी बार-बार खाना गरम होगा तो फालतू गैस वेस्ट होगी। और नहीं करूंगी तो कहेंगे ठंडा खाना खिलाती है मामी। अच्छा और अगर अमन होता तो क्या करती तुम? जाहिर सी बात है उसे स्ट्रिक्टली मना करूंगी। तो इन्हें भी मना कर दो। अरे ऐसे कैसे मना करूं? क्यों नहीं मना कर सकती? देखो तुम ये मत सोचो कि वो मेरी बहन के बच्चे हैं। ये सोचो कि वो तुम्हारे ही बच्चे हैं। अपना ही समझी ना। और जैसे अमन को ट्रीट करती हो वैसे ही ट्रीट करूं। अच्छा ऐसा है तो ठीक है। फिर मुझे क्या? बाद में कुछ हुआ तो आप ही देखिएगा और

संभालिएगा। हां हां ठीक है लेकिन तुम थोड़ा देख के चीजें करना। अब ये नहीं कि जबरदस्ती उन्हें परेशान करो। अरे मैं क्यों परेशान करूंगी? घर जैसे चलता है वैसे ही तो चलेगा ना। अब रात के 12:00 बजे खाने वाला सिस्टम तो नहीं होगा। अब तो तुम ही ये सब हैंडल करो। ये सब तुम्हारा डिपार्टमेंट है। जैसे अमन के साथ हो बस वैसे ही नितीश और रोहित के साथ भी रहो। ठीक है फिर। शाम का वक्त था। लवली हॉल में बैठकर साग बिन रही थी। तभी रोहित, अमन और नितीश आते हैं। मामी कुछ बढ़िया सा खाने का मन कर रहा है। बेटा दिन का दाल चावल रखा है खा लो। अरे

मामी अच्छा खाने का मन था। मेरा भी Zomato से कुछ ऑर्डर करे क्या? हां चलो Zomato से ऑर्डर करते हैं। क्यों Zomato से ऑर्डर करना है? अब कल ही मामा ने गुलाब जामुन मंगवाया था Zomato से। अब तुम लोगों को फिर से Zomato करना है। मन है मम्मी। मन तो बहुत कुछ करता है नितीश। लेकिन हर बार हम मन की नहीं सुन सकते। कई बार हमें कुछ चीजें छोड़नी पड़ती है। और तुम लोग पढ़ने वाले बच्चे हो। अच्छा खाओगे तभी तो अच्छा सोचोगे। तभी तो दिमाग काम करेगा। अब zomato के पिज़्ज़ा बर्गर से क्या होना है? कुछ भी तो नहीं। मामी ने तो इतना लंबा चौड़ा ज्ञान दे दिया

कि मेरी इच्छा ही खत्म हो गई। अरे एक दिन मंगा रहे हो उसमें भी मामी को कितनी दिक्कत है। क्या बोल रहे हो रोहित? कुछ नहीं मामी। चलो अब जाओ सभी लोग पढ़ाई करो। अब की बार पता है ना बोर्ड्स है? हां मम्मी ठीक है। ठीक है हम लोग जाते हैं। नितीश और रोहित अपने कमरे में जाते हैं और फोन पर अपनी मम्मी से बात करते हैं। क्या हाल-चाल है नितीश? ठीक ही है मम्मी। ठीक क्यों है? कोई दिक्कत है क्या वहां पर? दिक्कत तो हो रही है मम्मी। यहां पे मम्मी बहुत कंजूसी करती है। हम लोगों को बार-बार खाना गरम नहीं करने देती। अब भूख लगी थी। ज़ोममेटो खाने को बोला तो वो भी

मना कर दिया। बहुत तेज़ भूख लगी है। अब आप ही बताओ। भूख में पड़ने का कैसे मन करेगा? अच्छा ऐसा है क्या? मैं मामा से बात करूं? नहीं नहीं मम्मी मामा से मत बात करिए वरना मामी डांटेंगी। मामी सताती भी है क्या? हां अभी डांटा मामी ने जब zomato के लिए बोला तो अच्छा ऐसा है क्या? चलो ठीक है मैं देखती हूं। कुछ करती हूं। तुम लोग मन लगाकर पढ़ाई करो। तुम्हारी मम्मा तुम्हारे साथ है। ओके मम्मी बाय। बाय बेटा। मम्मी ये स्कूटी रखी रहती है फालतू। क्यों ना हम तीनों भाई इसी से कोचिंग आया जाया करें। हमें पैदल आना जाना नहीं पड़ेगा और हमें थकान भी नहीं लगेगी। थकान नहीं रहेगी

तो हम अच्छे से पढ़ाई कर सकते हैं। नहीं नहीं बेटा स्कूटी से नहीं जाना है कहीं भी। अभी तुम लोग छोटे हो। का मामी हम लोगों को स्कूटी चलाना आता है वो भी अच्छे से। हां मम्मी भैया तो कार भी ड्राइव कर लेते हैं। मैंने कहा ना नहीं चलाना आता है तब भी स्कूटी से नहीं जाना। लेकिन क्यों? क्यों क्या पेट्रोल का पैसा कहां से आएगा? उफो मम्मी ऐसी बात है तो हम मम्मी पापा से ले लेंगे। नहीं यह सब नहीं करना है। मम्मी पापा से पेट्रोल का पैसा मांगेंगे। फिर मम्मी पापा बोलेंगे इतनी छोटी-छोटी चीजों के लिए टोक रही है। मुझे नहीं चाहिए ये सब। क्या हुआ मम्मी? मैंने

बोला ना समझ में नहीं आता। जाओ भाभी पैदल कोचिंग। चल भाई चलते हैं। तीनों भाई पैदल ही कोचिंग के लिए निकल जाते हैं। भाई एक बार मुझसे पूछ लिया होता कि यह बात करने जा रहे हो। क्यों? हर चीज तुझसे पूछ के करेंगे क्या? नहीं भाई मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैंने पहले ही मां से पूछ के देखा था। वो नहीं मानी। तो अगर मुझसे बता दिया होता तो मैं बता देता कि मां नहीं मानेंगी। चल ठीक है ना कोई बात नहीं। जो हुआ सो हुआ। अभी कोचिंग पे फोकस करते हैं। नितीश और रोहित घर एक बैग के साथ लौटते हैं जिसमें ढेर सारा चिप्स, बिस्किट और ढेर सारी खाने की चीजें रखी थी। यह सब

क्या है नितीश? कुछ नहीं मामी वो पढ़ते वक्त खाने का मन करता है ना तो वही हम लोगों ने कुछ खाने की चीजें ले ली है। लेकिन मैंने कहा था ना तुम लोगों को यह सब नहीं खाना चाहिए। अभी कल ही इतना लंबा चौड़ा ज्ञान दिया था तुम लोगों को। उसके बावजूद भी तुम लोगों को समझ में नहीं आता। मम्मी हमने अपने पैसों से लिया है यह सब अपने पॉकेट बनी से बात पैसों की नहीं है रोहित बात पैसों की ही तो है मम्मी मम्मी ये आखिरी बार है उसके बाद हम नहीं लेंगे लेकिन अरे बोला ना रोहित नहीं लेंगे नहीं लेंगे मतलब नहीं लेंगे मम्मी अब जाओ टेंशन मत लो ठीक है हम ठीक है बेटा अब हम लोग

रूम में जा रहे हैं ठीक है अच्छा हुआ ये लोग आगे से ना लाने के लिए मान गए वरना अगर अमन यह सब देखता और वो भी यह सब खाने की जिद करता है तो मैं क्या करती फिर? नितीश और रोहित अपने कमरे में जाते हैं। तूने मुझे मामी के सामने मना क्यों किया? अरे छोड़ ना तू जानता ना मामी कितनी कंजूस है। वो हमारी बात नहीं मानेंगी। आगे से यह सब छुपा के लाएंगे। ओ तो ठीक है। हां। और अमन भी जिद ना करे यह सब देख के। हो सकता है इसीलिए मामी मना कर रही हो। हां भाई बात तो सही कह रहा है। चल अब इसे रखते हैं। रात में पढ़ते वक्त खाएंगे। ठीक है। अगला दिन आता है। सुषमा और हरीश लवली और

ललित के घर अचानक आ जाते हैं। ललित दरवाजा खोलने जाता है। अरे तू अचानक यहां कैसे? क्यों भैया? मैं नहीं आ सकती क्या? बिल्कुल आ सकती है। आइए आइए जीजा जी आप भी आइए। अरे ननद जी आप आइए आइए। रोहित और नितीश तो खुश हो जाएंगे आपको देख के। हां कहां है? वैसे बोलो। अभी तो कोचिंग गए हैं। वैसे आते ही होंगे। टाइम तो हो गया है आने का। चलिए तब तो हम लोग सही समय पर आए हैं अपने बेटों से मिलने। अरे तो मिलकर चली जाओगी? रुकने नहीं आई हो क्या? नहीं भैया हम तो मिलने ही आए हैं। आप लोगों से भी और बच्चों से भी। क्या बात है सुषमा कोई बात है क्या?

हां भैया तभी तो हम लोगों को आना पड़ा यहां पर। क्या बात है ना जी बताइए ना। भाभी आपको पता ही है कि नितीश और रोहित को हम यहां क्यों छोड़ के गए हैं। हां क्योंकि उनकी पढ़ाई अच्छे से हो सके। लेकिन भाभी वो लोग अच्छे से नहीं पढ़ पाते यहां पर। मतलब मैं समझी नहीं। मतलब कि मेरी रोहित और नितीश से बात हुई थी। उनका कहना है कि वह अच्छे से खा पी नहीं पाते। उनका कहना है कि उन्हें जबरदस्ती खाना खाना पड़ता है। जिससे उनका पढ़ाई का टाइम खराब हो जाता है। फिर खा के उन्हें नींद वििंद आने लगती है। फिर वो लोग सो जाते हैं। लेकिन सुषमा उन्होंने यह भी बताया

भाभी कि आप अमन को खाने पीने के लिए अच्छी-अच्छी चीजें देती हैं लेकिन उन्हें नहीं। उन्होंने स्कूटी के लिए बुलाया था। उसके लिए भी आपने मना कर दिया। हां क्योंकि अभी वह बच्चे हैं। मैं इतना बड़ा रिस्क नहीं लेने दे सकती। भाभी दोनों को स्कूटी बहुत अच्छे से चलानी आती है। गांव से शहर वो लोग स्कूटी से ही आते थे। हां लेकिन मुझे तो यह पता नहीं था और भैया उनका यह भी कहना है कि मामी बहुत कंजूस है। अमन को गुलाब जामुन दी लेकिन हमें नहीं। हमें डांटती भी है। नहीं बहन ऐसा नहीं है। देखो गुलाब जामुन अमन को दिया। उन लोगों को नहीं दिया तो

उसके लिए मैं भी लवली को बोलूंगा। लेकिन डांटने के लिए तो मैंने ही लवली को बोला है कि जैसे तुम अमन को डांटती हो वैसे ही उनको भी डांटो। दीदी गुलाब जामुन नितीश और रोहित ने पहले ही खा लिया था। वो अमन का हिस्सा था तो उसको दिया था। और देखो बहन बच्चे हैं। अब हर चीज उनके मन की तो नहीं होगी। अगर ऐसा हुआ तो बच्चे पढ़ाई के अलावा बाकी सब करेंगे। तो उनको कंट्रोल करना भी जरूरी है। तुम यह मत सोचो कि नितीश और रोहित हमारे लिए अलग है। वह भी हमारे ही बच्चे हैं। हां, मैं भी ऐसा ही सोचती हूं। ठीक है भैया। लेकिन हम दोनों बच्चों के

लिए खर्चा वगैरह भेजेंगे। इसके लिए मना मत करना। और आने जाने के लिए भी स्कूटी का ही इस्तेमाल करने दीजिए। ठीक है ननद जी आप बोल रही है तो कोई दिक्कत नहीं है। सभी बात कर रहे थे तभी नितीश, अमन और रोहित आते हैं। मम्मा आप हां आ जाओ सभी। मम्मा आप यहां कैसे? तुम लोगों की प्रॉब्लम सॉल्व करने आई थी बस। बेटा अगर कोई दिक्कत हो तो आप लोग हमें भी बता सकते हो। आप भी तो हमारे ही बच्चे हो ना? हां मम्मी। और बेटा कोई भी दिक्कत हो तो मामा से भी बता सकते हो। ठीक है? ठीक है मम्मा। थैंक यू भैया। आपकी मदद की वजह से ही दोनों बच्चे यहां पढ़ पा रहे

हैं। और भाभी आपको भी थैंक यू सो मच। अरे कोई नहीं सुषमा। यह भी तो हमारे ही बच्चे हैं

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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