1 घंटे की कुकिंग: दो बहुओं का खामोश विद्रोह/hi – News

1 घंटे की कुकिंग: दो बहुओं का खामोश विद्रोह/hi

1 घंटे की कुकिंग: दो बहुओं का खामोश विद्रोह/hi

1 घंटे की रसोई। नहाने का समय खत्म हुआ। नंदू पानी बंद करो। जी मालिक। वीर प्रताप हमेशा एक छड़ी रखता है और इसे दो बार बजाता है जिससे कि सबको समझ में आ जाए कि उनका समय नहाने का खत्म हुआ। नंदू पानी बंद कर देता है। इधर शीतल जिसने आज अपने बालों में मेहंदी लगाई थी, वह आधे बाल धुले में ही खड़ी रह जाती है। यह घर है क्या जेल? पता होता तो कभी इस जेल में आती नहीं। लड़का बहुत अच्छा है बोलकर पापा ने इस घर में मेरी शादी कर दी। हर चीज का टाइम है। अब नहाने का क्या टाइम होता है? कोई 2 मिनट में नहा लेता है तो कोई 1 घंटे में। अब ऐसे बालों में कैसे

निकलूं बाहर? इनको फोन करती हूं। शीतल बाथरूम से ही अतुल को फोन करके कहती है। यार मेरे बालों में मेहंदी लगी है। अब क्या करूं? पापा जी ने पानी बंद करवा दिया है। कैसे नहाऊंगी मैं? पापा ने पानी बंद करवा दिया है तो कोई पानी चालू नहीं करवा सकता। जब तक सब हॉल में नहीं आ जाते। मैं कुछ नहीं करता। तुम ऐसे ही रहो आज। बाल ही तो है। शीतल चिड़चिड़ा कर फोन रख देती है और अपने कमरे में रखे पीने के पानी से जैसे तैसे बालों की बस मेहंदी धोती है। थोड़ी देर में सब हॉल में आ जाते हैं और नंदू फिर से पानी चालू कर देता है। शौर्य तुम बाजार से सब्जी ले आओ लेकिन याद रहे

तुम ठीक आधे घंटे में वापस आओगे। 8:00 बज रहे हैं। मतलब 8:30 बजे तुम घर पर होने चाहिए। जी पापा। बुआओं नाश्ते में छोले भटूरे बना लो लेकिन खाना सबको 9:00 बजे तक मिल जाना चाहिए। उससे 1 मिनट ज्यादा नहीं होना चाहिए। जी पापा जी शीतल और रिया तुरंत रसोई में जाती है और जल्दी-जल्दी अपना हाथ चलाना शुरू कर देती है। वीर प्रताप सबको टाइम के साथ काम देता है। पूरे घर पर वीर प्रताप की हुकूमत चलती है। उससे पूछे बिना तो घर का एक पंछी भी पैर नहीं मार सकता। इधर रिया और शीतल बहुत परेशान हो जाती है। कितना भी जल्दी कर लेंगे भटूरे छोले नहीं बन पाएंगे। भाभी

पापा जी को पहले बोलना चाहिए था ना उन्हें छोले भटूरे खाने हैं तो कम से कम छोले फुला कर तो रखते हम अब यह है कि उबल ही नहीं रहा है क्या करें अब जैसे कच्चे पक्के बनेंगे वही डाल देंगे क्या करें इतने टाइम में कोई डिश बनती है क्या नॉर्मल रोटी सब्जी बन जाए वही काफी है भाभी आप भैया से बात कीजिए ना कि पापा जी से बात करें बाकी काम में तो ठीक है लेकिन खाने में टाइमिंग हटा दे तुम्हारे भैया कुछ करेंगे नहीं वो मुझे ही सुना देंगे वो तो खुद ही भीगी बिल्ली बन जाते हैं पापा जी के सामने देखा है उन्हें उन्हें कभी पापा जी के सामने ऊंची आवाज में बात करते।

कौन हमें बचाएगा इन सब से? इधर खाना बनाने का टाइम खत्म होता है। उधर वीर प्रताप अपनी छड़ी बजाता है। दो बार बहुएं रसोई से जैसे ही बाहर आती है वैसे ही दूध वाला दूध लेकर आता है। भाभी दूध ले लीजिए। पतीला कहां है? दूध लेने का समय खत्म हुआ। वापस ले जाओ। इस समय हम दूध नहीं लेते। तुम्हें पता होना चाहिए। 7:00 से लेकर 7:30 बजे का टाइम है। मालिक कभी-कभी कोई काम आ जाता है। वरना मैं तो सुबह ही आता हूं। अब इस दूध का मैं क्या करूं? मुझे नहीं पता। कल से टाइम पर आए तो ही दूध लेंगे नहीं तो दूध नहीं लेंगे। दूध वाला मुंह लटका कर

चला जाता है। खाना लगा दूं पापा जी। हां। 5 मिनट में खाना लग जाना चाहिए। और सबसे कह दो मिनट में टेबल पर आ जाए वरना खाना नहीं मिलेगा। जी पापा जी। दो मिनट में सब टेबल पर आ जाते हैं। 5 मिनट में बूहे खाना लगा देती हैं। यह क्या है बहू? छोले कच्चे हैं? यह कोई खाना है? एक घंटे में क्या-क्या हो जाता है और तुम लोगों से खाना नहीं बनता? खाना मुझे परफेक्ट चाहिए। ये आधा कच्चा पक्का नहीं। तुम दोनों इस साल अपने मायके नहीं जाओगी। पापा जी, मेरे मायके में शादी है। मेरे मायके में मुंडन है। हम अच्छे से खाना बनाने की कोशिश करेंगे। यहां कोशिश नहीं होती बहू। कल से

तुम दोनों को 1 घंटे की जगह 45 मिनट ही खाना बनाने के लिए मिलेंगे। सब नाश्ता करके अपने-अपने काम पर चले जाते हैं। वीर प्रताप हॉल में बैठा सब पर नजर रखता है। माई के जाने से मना करने के बाद दोनों बहुएं टेंशन में आ जाती है और मौका पाकर अपनी सास अंजना के पास जाती है। मम्मी जी आप देख रहे हैं ना पापा जी को। अब आप ही बताओ कैसे हम 45 मिनट में खाना बनाएंगे। यह पहला घर है जहां सास से ज्यादा ससुर की हुकूमत चलती है और रसोई ससुर के हिसाब से चलती है। अरे इसमें कौन सी बड़ी बात है? हमारे यहां तो ये खानदानी है। मेरे ससुर जी तो इनसे भी ज्यादा सख्त हैं। बैठने का

भी हमारा टाइम था और उस टाइम पर नहीं बैठे तो पूरे दिन खड़े रहना होता था। बहु यह सब कुछ नहीं है। तुम्हारे ससुर जी तो इस मामले में बहुत सॉफ्ट है। अब तुम लोग ही देखो कैसे क्या करना है। मैं तो कितना ज्यादा झेल कर बैठी हूं। लेकिन मम्मी जी वह मायके जाने वाली बात पर तो आप पापा जी से बात कर सकती हैं। साल भर में एक ही बार तो हम जाते हैं। उस पर भी पापा जी ने मना कर दिया। मेरे ससुर जी के राज में मैं 10-10 साल मायके का मुंह नहीं देख पाती थी। मेरे मायके वाले तो मेरी शक्ल ही भूल गए थे। कम से कम तुम्हारा ससुर जी ऐसा तो नहीं है। शीतल और रिया वहां से निराश हो

जाती हैं। इसी तरह दिन बीत जाता है और शाम को अतुल को घर आने में 8:00 बज जाते हैं। जैसे ही अतुल घर में पैर रखता है वीर प्रताप कहता है वहीं रुक जाओ। अंदर आने की जरूरत नहीं है। तुम्हें पता नहीं है रात को आने का। आखिरी वक्त 8:00 बजे का है। वो पापा मैं क्या करता? पहले ऑफिस में देर हो गई। फिर ऑफिस में साथ काम करने वाले आदमी को मुझे उसके घर छोड़ने जाना पड़ा। ठीक है जाना पड़ा तो उसके घर ही रह जाओ। आज तुम्हें घर आने को नहीं मिलेगा। अरे पापा मेरी बात तो समझिए। नंदू दरवाजा बंद कर दो। रात को बाहर रहेगा तो इसकी अकल ठिकाने

आ जाएगी। अतुल को इस तरह देखकर शीतल का खून सूखने लगता है। वो मन ही मन कहती है। एक जरा दया नहीं आती। मम्मी जी और पापा जी को किसी पर बहुत निर्दई हैं यह लोग। अतुल पूरी रात घर के बाहर बैठा रहता है। अगले दिन अतुल की ऐसी हालत देखकर घर में सब अपने-अपने टाइम से काम करते हैं। रिया और शीतल रसोई में जाती हैं और चटनी पीसने लगती है। भाभी इतनी जल्दी क्या ही बनेगा? ब्रेड सैंडविच बना लेते हैं। धनिया की चटनी पीस लिए आप मसाला बना लो। ठीक है। नाश्ता तैयार करके टेबल पर लगाती हैं। और वीर प्रताप कहता है, ऐसा है कि बिजली का बिल बहुत आने लगा है। मिक्सी बहुत देर तक

चलती रहती है। नंदू मिक्सी ग्राइंडर को मेरे कमरे में रख दो। महीने में दो बार ही मिक्सी मिलेगी। बाकी समय हाथ से जो भी पीसना है पीसो। इससे सेहत भी अच्छी रहती है। रिया और शीतल एक दूसरे का मुंह देखने लगते हैं। मालिक तभी मैं सोचूं पानी तो टाइम पर ही बंद कर देता हूं। फिर बिजली का बिल इतना कैसे आ रहा है? नंदो तुम मेरी गाड़ी साफ करो। मैं खाकर बाहर चलूंगा। सैंडविच से पेट नहीं भरता बहु। नाश्ता ठोस होना चाहिए और हेल्दी भी। ठीक है। रिया और शीतल सबको अलग-अलग स्टाइल की सैंडविच देती है। जिसको जैसी खानी हो। मसाला सैंडविच, वेजिटेबल सैंडविच, सैंडविच

विद ब्रेड, बटर, भुजिया। खाकर वीर प्रताप नंदू के साथ चला जाता है। इधर रिया और शीतल कितने दिनों बाद चैन की सांस लेती है। आज दोपहर का खाना आराम से बनाएंगे। टाइमिंग दिखने वाला कोई नहीं है। भाभी बहुत दिन से कुछ अच्छा नहीं खाया। आज चाऊमीन मंचूरियन बनाते हैं। टाइम भी है। हां, यह सही है। रिया और शीतल दोनों आराम से चाऊमीन और मंचूरियन बनाने लगती है। इधर काम वाली भी वीर प्रताप के ना होने से आराम से धीरे-धीरे काम करती है। यहां खाना तैयार होने ही वाला था और रसोई में काम वाली गाना गाते-गाते बर्तन धो रही थी कि उधर वीर प्रताप आ जाते हैं। रसोई से नल की

आवाज सुनकर वह चिल्ला कर कहता है, नंदू पानी बंद करो। एक दिन क्या मैं घर से बाहर चला जाता हूं? तो सब अपनी मर्यादा खो देते हैं। डिसिप्लिन भूल जाते हैं। पापा रिलैक्स करो। बर्तन मांझ दिए हैं लेकिन धोऊं कैसे? पानी बंद कर दिया है। इस तरह से अब मैं नहीं काम करने वाली यहां। तू बिना गुस्सा क्यों होती है? थोड़ी देर बाद जब पानी खुलेगा तब धो देना। आज ना मैं तुझे चाउमीन खिलाऊंगी। एक तू ही तो है जिससे हम अपना दुख बांट सकते हैं। तू भी चली गई तो क्या होगा हमारा? यह सब रोना धोना करके मेरे कोई इमोशनल ब्लैकमेल मत करो आप दोनों। बड़ी दिक्कत है भाई इस घर में। काम वाली

काम छोड़कर चली जाती है। काम वाली के चले जाने से शीतल और रिया की खटिया खड़ी हो जाती है। ऊपर से आग में घी डालने उसकी ननद भी आ जाती है। दोपहर का खाना दोनों देवरानी जेठानी जब परोसती हैं। चाउमीन मंचूरियन इस वक्त कौन खाता है भाभी? वो बहुत दिनों से बना नहीं था ना दीदी और हम बाहर भी नहीं जाते तो सोचा आज घर पे ही बना लें। क्या आप लोग भी दाल चावल सब्जी बनाती कुछ हेल्दी या मैदावेदा मैं नहीं खाती मुझे मेरी सेहत मेंटेन रखनी पसंद है तो आपके लिए लस्सी बना देती हूं दीदी हम ठीक है रिया रसोई में जाकर लस्सी बनाती है भगवान किस कलम से तूने मेरी किस्मत लिखी

थी एक किसकी कमी थी अब वो भी आ गई पूरा मार कर ही छोड़ेंगे ये लोग हमें रिया लस्सी बनाकर मेघा को देती है ओ भाभी कितनी ठंडी लस्सी है आप लोग ना मुझे टॉन्सिल करवा के रहोगी। दीदी वो लस्सी खट्टी ना हो इसलिए फ्रिज में रख दी थी। पहले फ्रिज होते ही कहां थे? फ्रिज का सामान खराब ही करता है स्वालक। ऊपर से बिजली बिल इतना आता है। अब समझ में आ रहा है मुझे इतनी कमजोरी कैसे आ रही है। नंदू फ्रिज रसोई से हटा दो और मेरे कमरे में रख दो। खाना खाकर सब सोने चले जाते हैं और शीतल कहती है, एक तो खाना बनाने के लिए 1 घंटे का टाइम मिलता है। उसमें भी फ्रिज और

मिक्सी की सुविधा नहीं। तो इतनी जल्दी कहां से खाना बनेगा? ऊपर से दीदी अलग ही हेल्दी का राग अलाप रही हैं। अब उन्हें मैं दिखाती हूं हेल्दी क्या होता है। हमारा साथ देने वाला कोई नहीं है शीतल। पर हमें तो अपने लिए कुछ करना ही होगा। वैसे भी मायके तो इस साल जाने को नहीं मिलेगा। तो अब किस बात का डर? अगले दिन नाश्ते में वीर प्रताप कहता है, बहु जरा कचौड़ी बना दो। जी पापा जी। रिया रसोई में जाती है और शीतल से कहती है, मैं जल्दी से बर्तन धोती हूं। तू गर्म पानी में चने डाल दे और कचौड़ी का आटा लगा दे। बहुत काम है। दही फेंटना है, इमली की चटनी बनानी है, धनिया

की चटनी पीसनी है। जस्ट चिल भाभी अब कोई इतनी हड़बड़ी नहीं है। पूरा एक घंटा है हमारे पास। शीतल राज कचौड़ी बनाने में कम से कम 2 घंटे लगते हैं। इसमें भी अगर चटनियां पहले से बनी हो और यहां तो कुछ बना हुआ भी नहीं है। भाभी पहले बर्तन करते हैं साथ में। बर्तन करने के बाद शीतल कहती है भाभी आप आटा लगाओ तब तक मैं बाकी काम कर लेती हूं। शीतल चने बॉईल करके उसमें आलू, प्याज, धनिया पत्ती डालती है। फिर उसमें जीरा और धनिया का मसाला डालकर काला नमक डाल देती है और ऊपर से भुजिया डाल देती है। यह क्या है शीतल? भाभी वक्त और सामान जितना मिलेगा, हम उसी में बना सकते

हैं ना। चलिए आप बेलिए मैं पुड़िया उतार देती हूं। एक घंटा होते ही वीर प्रताप अपनी छड़ी बजाने लगता है। रिया और शीतल खाना लाकर टेबल पर सजा देती हैं। पूरी, चना और दही सबको देती है। राज कचौड़ी सबके लिए। दिमाग तो ठीक है भाभी आपका। यह राज कचौड़ी है। दिमाग तो ठीक है दीदी मेरा। क्यों? इसे राज कचौड़ी कहते हैं क्या? भूल गई क्या राज कचौड़ी बनाना? जब शादी होकर आई थी, तो पहली रसोई में यही बनाई थी क्या? पापा जी उस वक्त और अभी में बहुत अंतर है। उस समय टाइम की कोई सीमा नहीं थी। हमारे पास मिक्सी फ्रिज थे काम वाली थी। तो उस समय उस स्टाइल की राज कचौड़ी

थी। यह 1 घंटे वाली हेल्दी राज कचौड़ी है। क्यों? सही कहा ना मैंने दीदी? दीदी आप ही ने तो कहा था मैदे से आपको दिक्कत है। आपकी हेल्थ भी तो जरूरी है ना। सब चुप हो जाते हैं और चुपचाप से खाना खा लेते हैं। शौर्य भैया मुझे मेरे ससुराल छोड़ दीजिए। बेटा कल ही तो आई है और आज तुझे जाना है। हां पापा वो इनका मन नहीं लगता ना। हां दीदी एक आप है जो मायके में रहना नहीं चाहती और एक हम है जिन्हें मायके जाने नहीं दिया जाता। लेकिन मेघा मेरे पास सिर्फ 2 घंटे हैं। मुझे मार्केट का सारा काम भी करना है। वरना पापा मुझे घर से निकाल देंगे। जाकर

मेघा बेटी को उसके ससुराल छोड़कर आ। मेरी लाड और रानी के लिए कोई नियम नहीं है। बेचारी साल भर में कभी-कभी तो आती है। जी पापा जी। शौर्या मेघा को छोड़ने चला जाता है और रिया रसोई में शीतल की पीठ थपथपाते हुए कहती है नाच तो तुमने कमाल कर दिया। धोती फाड़ के रुमाल कर दिया। अब रोज यही होगा भाभी। इन्हें भी समझ आना चाहिए कि पाबंदी ठीक है लेकिन हर जगह नहीं। रसोई औरतों की होती है ना कि मर्दों के हिसाब से चलती है। चलिए टीवी देखा जाए। शीतल और रिया हॉल में नाश्ता करते हुए टीवी देखने लगती है। भाभी बहुत दिनों के बाद टीवी देखने को मिल रहा है ना

और खाना भी आराम से खा रहे हैं। मैं तो कुछ भी खा लूंगी। अब तो चाह भी मर गई है। मुंह का टेस्ट ही खत्म हो गया है। साथ में जिंदगी का टेस्ट भी खत्म ही है। इतने में वीर प्रताप वहां आकर कहता है, नंदू टीवी बंद करो। नाश्ता करने का वक्त सबके लिए 15 मिनट है। टीवी चलती रहेगी तो बिजली बिल के साथ टीवी भी खराब होता है। रिया और शीतल उठकर अपने-अपने कमरे में चली जाती हैं। और फिर दोपहर में खाने के वक्त अंजना कहती है बुआ अभी पाव भाजी बना लेना। रात का काम भी हो जाएगा। जी मम्मी जी हो जाएगा। 1 घंटा बहुत है। आधे घंटे में ही बन जाएगा यह तो।

शीतल और रिया रसोई में जाती है। दोनों बर्तन करती है पहले। तुमने तो पापा जी को सबक सिखाने की ठान ली है। और नहीं तो क्या जब देखो इस टाइम में यह होना चाहिए। इस टाइम में वो होना चाहिए। अब पांव भाजी में क्या करेगी तू? करना क्या है? बस मिलकर सब्जी काटनी है। एक घंटे में जो हो सकेगा वही करेंगे ना। उन्हें खाना भी वैरायटी वाला चाहिए। टेस्टी चाहिए। फिर हेल्दी भी रहने का ड्रामा चाहिए। 1 घंटे में यह सब कुछ होगा। यह कैसे पॉसिबल है? शीतल और रिया सब्जी काटती है। फिर उसे बॉईल करके रख लेती है। दूसरी ओर आलू उबालकर उसका भर्ता बनाकर बॉईल सब्जी में डाल देती है।

और पांव बिना सेके ही रख देती है। खाने का वक्त होता है। खाना टेबल पर लगाकर शीतल कहती है, पाव भाजी तैयार है। यह पाव भाजी है क्या? पांव तो सेका ही नहीं है तुमने यार। इससे कोई कैसे खाएगा? अरे भाजी में तो कोई मसाला ही नहीं है। बस बॉईल करके रख दिया है। बाबू ये क्या है? मम्मी जी यह पाव भाजी है। इसे खाने से हेल्थ भी अच्छी रहेगी और तो और पाव भाजी का स्वाद भी आ जाएगा। सही कहा ना पापा जी? तुम दोनों ने अलग ही परेशान कर रखा है। अरे हमने क्या किया? यह 1 घंटे में बर्तन धोकर इतना सब बना दिया कम है क्या? 1 घंटे में जैसी जितनी पाव भाजी बनती थी बना दी

हमने। सब चुप हो जाते हैं और खाना खा लेते हैं। अब रोज इसी तरह से शीतल और रिया डिश के नाम पर आधा-अधूरा खाना देती। एक दिन तो हद ही हो जाती है जब मेघा के पति सौरभ अपने ससुराल आते हैं। उसके आते ही वीर प्रताप उसके आगे पीछे करने लगते हैं। बहुत अमा जी के लिए नाश्ता लगाओ जो भी उन्हें पसंद है। मेरी पसंद तो आप लोगों को पता ही है भाभी। जी सौरभ जी अभी लाती हूं। बहुत 10 मिनट में नाश्ता लगा देना। शीतल लस्सी बनाती है और रिया चाऊमीन। भाभी क्या इतना कर रही हो? बॉयल चाऊमीन में कच्ची सब्जी रखकर परोस दो। अब सौरव जी को भी तो पता चले उनके ससुराल में क्या चल

रहा है। हां ठीक कहा तुमने। शीतल औरिया नाश्ता लगाती है। भाभी यह लस्सी तो एक जरा ठंडी नहीं है। मुझे ना ठंडी पसंद है। मजा ही नहीं आएगा। वो क्या है ना सरोज जी? मेघा दीदी और पापा जी को हमारी सेहत का बहुत ख्याल है। इसीलिए रसोई से फ्रिज हटवा दी। बिजली का बिल बहुत आता है ना। मेघा तो खुद चिल्ड कोल्ड ड्रिंक पीती है और हमारे घर में फ्रिज 24 घंटे ऑन रहती है। आप पी लीजिए सौरव जी हमने इतने प्यार से बनाया है तो वो तो पी लूंगा लेकिन यह चाऊमीन तो नहीं खाई जाएगी कच्ची सब्जी और बॉईल चाउमीन कुछ टाइम और लग जाता लेकिन खाने का स्वाद तो

आना चाहिए अब खाना तो मन से खाना है कोई दिन बताने के लिए नहीं खाना ये आप समझ रहे है ना सौरभ जी लेकिन 10 मिनट में तो इससे ज्यादा कुछ नहीं बन पाता हमने तो फिर भी इतना कर दिया और 10 मिनट में जितना बना इतना भी आपको नहीं देते तो आपको बिना खाना खाए जाना पड़ता ये हमारे पापा जी का नियम है क्या? 10 मिनट में नाश्ता और 1 घंटे में खाना। पता है भाभी मेघा को कितना वक्त लगता है खाना बनाने में? कोई आ जाए घर पर तो मुझे बाहर से ही ऑर्डर करना पड़ता है और रोज सुबह का नाश्ता बनाने में दो-द घंटे लगाती है। उसमें भी बस रोटी और सब्जी

बन पाती है। जिसमें भी हमारे घर पर हर काम के काम वाली है। अब सबकी अपनी-अपनी किस्मत सौरव जी। सॉरी भाभी। कोल्ड ड्रिंक्स तो मैंने पी ली है लेकिन यह चाव मैं नहीं खा पाऊंगा। बुरा मत मानना आप दोनों। पापा जी चलता हूं। इधर आया था तो मिलने चला आया। सौरव चला जाता है और उसकी बात सुनकर वीर प्रताप को खुद में ही बहुत खराब लगता है कि उसकी बेटी कितने आराम से अपने ससुराल में रहती है और वह अपनी बहुओं पे कितनी पाबंदी लगाता है। उसी वक्त वो नंदू से कहता है नंदू कोई बर्तन धोने वाले को अभी पकड़ कर ले आओ। फ्रिज और मिक्सी रसोई में रखवा दो। बहुओं से कह दो कि रात का खाना

उन्हें जब जैसे जो बनाना हो बना ले। इतना कहकर वीर प्रताप अपने घर से चला जाता है। रिया शीतल को ताली मारते हुए कहती है, यह तो गजब हो गया। मुझे मेरी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा। तूने सही कहा था। रे राय दुरस्त आए। सौरव जी तो हमारे लिए भगवान निकले। रात में शीतल और रिया बहुत अच्छा खाना बनाती है। जिसे खाकर सब खुश हो जाते हैं। आज खाना लाजवाब बना है। सच में? सब्जी पनीर की टू गुड। बहु मिक्स वेज तेरे पापा जी का फेवरेट है। वो भी बहुत अच्छा बनाया है। अब रोज इसी तरह खाना मिलेगा क्योंकि यह एक घंटे वाली रसोई नहीं है ना। सब हंसने लगते हैं और

रिया शीतल भी मेघा की तरह अपनी मर्जी से अपनी रसोई चलाने लगती

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

Related Articles

News 7 months ago

मेरे पति चुपके से अपने ‘सबसे अच्छे दोस्त’ के साथ 15 दिन की ट्रिप पर गए, और जब वे लौटे, तो मैंने एक सवाल पूछकर उनकी उम्मीदें तोड़ दीं:/hi

मेरे पति चुपके से अपने “सबसे अच्छे दोस्त” के साथ 15 दिन के ट्रिप पर…

News 7 months ago

मेरी पहले की बहू अपने बहुत बीमार पोते की देखभाल के लिए एक हफ़्ते तक मेरे घर पर रही, और दो महीने बाद वह फिर से प्रेग्नेंट निकली, जिससे हंगामा हो गया। मेरा बेटा ऐसे बर्ताव कर रहा था जैसे कुछ हुआ ही न हो, लेकिन मेरे पति… वह कांप रहे थे और उनका चेहरा पीला पड़ गया था।/hi

मेरी पुरानी बहू अपने बहुत बीमार पोते की देखभाल के लिए एक हफ़्ते तक मेरे…

News 7 months ago

Hearing that his mother-in-law had terminal cancer, the son-in-law rushed home, gathering all his savings from the past few years to buy a car, claiming it was a year-end sale but actually fearing he’d be forced to borrow money to pay for his mother’s treatment. His wife knew, but just smiled faintly and said, “Let me give you some more money, buy a really nice car so you can drive comfortably.” True to his word, the next day the couple went to the dealership to choose a car, put down a deposit, and two days later received their new vehicle. Driving the brand-new car home, he proudly showed it to his mother and siblings, but his mother was sitting in the middle of the house crying, delivering news that left him utterly devastated. How could karma come so soon?/hi

Hearing that his mother-in-law had terminal cancer, the son-in-law rushed home to Mumbai, gathering all…