एक साथ मिलकर खाना बनाने वाली बहुएं। ठंड का वक्त था। सभी अपने-अपने घरों में काम में व्यस्त थे। तभी बाहर गली में सुबह के समय बर्तन की खटपट की आवाजें और अचानक तेज बहस शुरू हो जाती है। सारे घर का काम मैं क्यों करूं? मैंने ठेका थोड़ी ले रखा है पूरे घर के काम करने का। तुम मैं भी अकेली क्यों करूं? पूरा दिन मैं ही रसोई में खड़ी रहती हूं। तुमसे तो एक साथ खाना भी नहीं बनवाया जाता। पूरे दिन बस बिस्तर में पड़ी रहती हो। पड़ोस की औरतें खिड़कियों से झांकने लगती हैं। सास सोफे पर बैठी सिर पकड़ कर परेशान हो जाती है। हे भगवान कब तक तुम दोनों लड़ती रहोगी?

दो-दो बहुएं हो मिलकर काम नहीं कर सकती क्या? बिल्कुल खुद तो आपको कोई काम नहीं करना पड़ता ना। इसलिए हमें ही भाषण सुना रही हैं। हां, पूरा दिन हम ही किचन में खटती हैं [संगीत] और ऊपर से उल्टा हमको ही गलत बताती हैं। इतने में अंदर से तेज-तेज़ कदमों से नंद बाहर आती है। भाभी मेरी मम्मी को बीच में मत लाओ। वो हमेशा तुम दोनों का भला ही सोचती है। हां हां सबको पता है आपकी मम्मी सिर्फ अपनी बेटी की फिक्र करती है बहुओं की नहीं। और अगर इतनी ही दया आती है तो आकर एक बार रसोई में दो रोटियां बना के दिखाओ। अब बस एक शब्द और नहीं। जिस दिन मैं किचन

में उतर गई ना तो तुम दोनों को पता चल जाएगा असली मेहनत क्या होती है। दोनों बहूए एक दूसरे की तरफ घूरते हुए मुंह फेर कर अलग-अलग दिशाओं में चली जाती हैं। अगले दिन पड़ोस की चार पांच औरतें अपने-अपने दरवाजे पर चौकियों पर बैठी धूप सेक रही होती है। अरे सुधा [संगीत] जी आज आपकी दोनों बहू ने तो सुबह-सुबह पूरा मोहल्ला हिला दिया। खुद तो लड़ती है। ऊपर से आपकी बेटी रिया [संगीत] को भी बीच में खींच लेती है। सुधा हल्की सी शर्म और गुस्से में सिर पर हाथ रखती है। सच कहूं [संगीत] बहन मुझे तो अब डर लगने लगा है कि कहीं मेरी तीसरी बहू नेहा भी

शादी के बाद वैसे ही ना निकल आए। अपने तीनों बेटों की शादी की इतनी खुशी की पर बहुएं दिन-बदिन मुश्किल बनती [संगीत] ही जा रही है। अरे बहन तुम तो फिर भी खुशकिस्मत हो। मेरे घर में तो तीन-तीन बहुएं हैं। लेकिन हाय [संगीत] रे नसीब एक भी काम की नहीं। बहुएं अब पहले जैसी कहां रही? [संगीत] हम तो एक शब्द सुनकर भी चुप हो जाती थी। यह बहुएं तो पलट कर जवाब ही नहीं पूरे [संगीत] मोहल्ले को तमाशा दिखा देती हैं। हे भगवान क्या मेरे साथ भी यही होगा? मेरा खुशहाल घर भी बहुओं के कलेश से भर जाएगा। अगली सुबह गली में दूध वाला साइकिल से दूध

बांट रहा होता है। अचानक एक घर से चिल्लाने की आवाजें आने लगती हैं। मैंने कहा था ना सुबह की सब्जी मैं नहीं बनाऊंगी। तुम ही कर लो। और मैं भी कह चुकी हूं कि रोटी मैं अकेले क्यों बनाऊं? नौकरानी थोड़ी हूं मैं। देखते ही देखते दोनों घर से बाहर सड़क पर आ जाते हैं। लोग दरवाजों से झांकते बच्चे हंसते हुए इकट्ठा हो जाते हैं। जब पति ऑफिस गए होते हैं तो मैं ही सब करती हूं और तुम आराम फरमाती हो। मैं आराम पूरा घर मैं ही चलाती हूं। तुमसे तो नमक और चीनी भी अलग नहीं होते। किसी में कुछ भी डाल देती हूं। गली में सब लोग मजे ले रहे होते हैं।

अरे भाई आज तो लाइव शो शुरू हो गया। तभी उनकी सास गुस्से से बाहर आती है। बस दोनों चुप अंदर चली जाओ अभी के अभी। बहुएं मुंह बिचका कर गुस्से से कहती है, हम अच्छा। बेलन और चिमटा नीचे करते हुए गुस्से से पैर पटक कर वापस घर में चली जाती हैं। सास शर्म से आसपास वालों की तरफ हाथ जोड़ लेती है। गली के हर घर के गेट पर औरतें खड़ी होकर बातें कर रही होती है। किसी के हाथ में चाय, किसी के हाथ में चावल चुनने की प्लेट होती है। अरे रोज-रोज हर घर में बहुओं की लड़ाई होती रहती है। लगता है आजकल की चांदनी [संगीत] सब जली हुई निकलती है। अब तो बहुएं यही

चाहती हैं। ससुराल वालों को निकाल बाहर करो और घर पर खुद ही राज करो। शुरू में बड़ी सीधी-सीधी बनती है। कहती है मां जी मां जी और फिर धीरे-धीरे ऐसा रंग दिखाती है कि पूरा मोहल्ला तमाशा देखता है। सब औरतें हंसती हैं और सिर हिलाती हैं। क्या मैं भी हमेशा इसी डर में [संगीत] जीती रहूंगी? क्या मेरे घर भी एक दिन ऐसी ही लड़ाईयों का मैदान बन जाएगा? उनके चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही होती है। अगले दिन सुबह ड्राइंग रूम में प्रीतम अखबार मोड़ कर रख लेते हैं और गंभीर होकर कमला देवी की तरफ देखते हैं। बच्चे भी सोफे पर बैठे होते हैं। प्रिया

भी पास में मोबाइल लिए बैठी होती है। कमला मैंने तुम्हें इतने रिश्ते दिखाए। लड़कों की उम्र हो रही है। अब तो कोई लड़की चुन ही लो। तुम तो किसी पर हामी ही नहीं भरती। शादी तो करनी ही है लेकिन [संगीत] लड़की सोच समझ कर चुनी पड़ेगी। आजकल की लड़कियां दिन रात क्लेश ही क्लेश पूरा मोहल्ला देख लो बहुओं के झगड़े ही तो सुनाई देते हैं। ससुर एक फोटो एल्बम निकाल कर टेबल पर रख देते हैं। अच्छी-अच्छी लड़कियों के फोटो लाया हूं। देख लो। कमला देवी एक-एक तस्वीर देखती है पर हर फोटो पर नाक भूसिकोड़ देती है। शकल सूरत पर भरोसा। [संगीत] आजकल शुरुआत

में हर लड़की सीधी बनती है। फिर रंग दिखाने लगती है। [हंसी] मम्मी को हर लड़की में कमी लगती है। हे भगवान [संगीत] बस मेरी बहुएं सही निकल आए। बस यही डर है। दो-तीन दिन में सारा परिवार कई घरों में रिश्ते देखने जाते हैं। कहीं लड़की बहुत बोलने वाली, कहीं बहुत चुप, कहीं घर वालों का रवैया पसंद नहीं आता। हर बार नहीं यह [संगीत] नहीं जलेगी। बहुत स्मार्ट है। संभालेगी नहीं। बहुत सीधी है। घर चलाएगी नहीं। बेटे थक जाते हैं और कमला माथा पकड़ लेती है। अरे कमला तुम्हें कौन सी देवी चाहिए? एक दिन एक साधारण सुसंस्कारी मेहनती लड़की के परिवार में जाते हैं। लड़की सबके लिए चाय

नाश्ता लाती है। कमला देवी उसकी हर बात ध्यान से देखती है और पहली बार मुस्कुराती है। यही ठीक है। बेटों के चेहरे पर राहत की मुस्कान फैल जाती है। कुछ दिनों बाद बैंड बाजा, रोशनी, सजावट [संगीत] एक साथ तीन बेटों की शादी हो जाती है। गृह प्रवेश का शुभ अवसर आ जाता है। दरवाजे पर कलश रखे होते हैं। तीनों बहुएं मेघा, दिव्या और ज्योति शर्मीली, सजी धजी सिर झुकाई खड़ी होती हैं। कमला देवी आरती करती हैं लेकिन उनके मन में बेचैनी होती है। भगवान मेरे घर में [संगीत] प्यार और शांति बनाए रखना। कहीं मेरे साथ भी मोहल्ले की और सासू जैसा ना हो जाए।

वो हल्की सी घबराहट छिपाते हुए तीनों नई बहुओं की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखती हैं। अगले दिन तीनों बहुएं सजधज कर हाथ में पूजा की थाली लिए कमला देवी के पास आती हैं। मम्मी जी आज हमारी पहली [संगीत] रसोई है। आप बताइए क्या बनाएं? जो तुम्हें अच्छा लगे वो बना लो बेटा। नहीं मम्मी जी पहली रसोई है हम वही बनाएंगे जो आपको पसंद हो। जी मम्मी आपकी पसंद सबसे पहली। चलो ठीक है। मुझे आलू गोभी, [संगीत] दाल, तड़का और गरम-गरम फुलके बहुत पसंद है। और खीर भी बिना मिठाई। पहली रसोई अधूरी है। तीनों बहुएं रसोई में एपिन पहनकर जुट जाती हैं। वो काम को आपस में बांट लेती हैं।

मेघा सब्जी काटना और सब्जी बनाना, दिव्या दाल और तड़का तैयार करना, ज्योति फुल्के और खीर बनाना होता है। सब मिलकर बातें करते हुए काम करती हैं। अगर कहीं नमक ज्यादा हो गया तो पहली [संगीत] रसोई की बदनामी हो जाएगी। मुझ पर छोड़ दो। खुलके तो मेरे दोस्त हैं। तीनों खिलखिला कर हंसती हैं। खाना पकने की खुशबू घर भन में फैल जाती है। सब लोग डाइनिंग टेबल पर बैठे होते हैं। सासससुर और तीनों भाई एक-एक निवाला चखते हैं। वाह! ऐसा स्वाद तो बरसों बाद मिला। हमारी बहुएं तो कमाल है। पहले ही दिन मिलकर काम किया। तीनों बहुएं एक दूसरे की ओर देखकर

मुस्कुराती हैं। भाभी, अब रोज [संगीत] ऐसा ही खाना बनाती ना। अगले दिन सुबह रसोई में हल्की-हल्की आवाजें होती हैं। तभी कमला देवी ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठकर आवाज लगाती हैं। भगवान जरा इधर आना। आज पड़ोस की ओर से कुछ मेहमान आ रहे हैं। उनका बहुत मन था कि तुम तीनों से मिले। तो जरा अच्छा सा खाना बनाना। लोगों की भीड़ होगी। संभाल लोगी ना। तीनों बहुएं एक दूसरे की ओर देखती हैं और मुस्कुरा कर जवाब देती हैं। मम्मी जी आप बिल्कुल टेंशन मत लीजिए। हम पर बस सब छोड़ दीजिए। आज तो सारी पड़ोस की आंटी सिर्फ हमारी तारीफ ही करेंगी। देखते जाइए। बस आप आराम

कीजिए। हम काम बांट लेते हैं और मिलकर सब संभाल लेंगे। कमला देवी थोड़ी राहत की सांस लेती है पर दिल में कहीं ना कहीं चिंता रहती है। रसोई में तीनों बहू मिल बांटकर काम करती हैं। कोई सब्जियां काट रहा होता है। कोई चूल्हे पर खड़ी है तो कोई मिठाई सजाने में लगी होती है। तीनों के चेहरे पर उत्साह और खुशियों की चमक दिखती है। बातें, हंसी और काम का बढ़िया मेल दिखता है। जरा नमक देना ना और यह सब्जी की आंच हल्की कर देना। मिठाई तैयार। अब सजावट [संगीत] मैं करूंगी। और रोटी मैं बनाऊंगी। चलो सब बढ़िया हो रहा है। थोड़ी देर बाद डोर बेल बजती है। कमला देवी

मुस्कुराते हुए आंटियों को अंदर लाती हैं। सभी औरतें घर की साफ सफाई और सजावट देखकर ही प्रसन्न हो जाती है। अरे कमला तेरी तो किस्मत [संगीत] चमक गई। तीन-तीन बहुएं और सुनने में आया है। सब बहुत अच्छी हैं। जरा दिखा [संगीत] तो कैसी हैं? क्या करती हैं? इतने में तीनों बहू रसोई में दिख जाती हैं। औरतें चौंक जाती हैं। अरे वाह, तीनों मिलकर काम कर रही हैं। आजकल की बहुएं तो एक दूसरे का मुंह तक नहीं देखती। शाबाश कमला। बड़ी संस्कारी बहुएं मिली है तुझे। थोड़ी देर बाद तीनों बहुएं गरम-गरम खाना सजाकर परोसती हैं। औरतें खाना खाकर खुश हो जाती हैं।

खाना तो बहुत स्वादिष्ट है। [संगीत] ऐसी बहुएं तो किस्मत वालों को मिलती हैं। सभी उठकर जाती हैं और कमला देवी उन्हें बाहर छोड़ने आती हैं। लेकिन जाते-जाते माहौल बदल जाता है। देख कमला अभी तो नई-नई आई हैं इसलिए इतनी बनी बनाई और आज्ञाकारी लग रही हैं। कुछ महीनों बाद रंग दिखाएंगी बहुएं। [संगीत] तो बहुएं ही होती हैं। ज्यादा भरोसा मत करना। हां हां अभी तो शादी पीरियड चल रहा है। बाद में पता चलेगा। [हंसी] और वे हंसती हुई चली जाती है। कमला देवी के चेहरे का रंग उतर जाता है। उनकी आंखों में चिंता भर जाती है। हे भगवान मेरी बहुएं सच में अच्छी ही

निकले। मेरे घर का सुख बना रहे। अगली सुबह पूरे घर में हलचल होती है। तीनों बहुएं फिर से एक टीम की तरह काम पर जुटी होती हैं। पहली बहू मेघा झाड़ू पोछा कर रही होती है। दूसरी बहू ज्योति रसोई में बर्तन साफ कर रही होती है। तीसरी बहू दिव्या चाय और नाश्ता तैयार कर रही होती है। मुस्कुराते हुए वह एक दूसरे की मदद कर रही होती है। रुको रुको यह कोना मैं साफ कर देती हूं। तुम चाय तैयार करो। सब मिलकर करेंगे तभी काम जल्दी खत्म होगा। काम होते ही तीनों एक साथ बैठकर चाय पीती हैं। उनके चेहरे पर अपनापन दिख रहा होता है। कमला देवी दूर से इन्हें देख रही होती

हैं। उनकी आंखें चौड़ी रह जाती हैं। ये तीनों तो सच में बहुत [संगीत] समझदार हैं। ना झगड़ा ना तकरार। ऐसी बहुएं कहां मिलती हैं आजकल। शुरुआत में सब [संगीत] अच्छी लगती हैं। बाद में रंग दिखाएंगी। ना जाने सच क्या है। क्या सच में ये हमेशा [संगीत] ऐसी ही रहेंगी। अगले दिन तीनों बहुएं हंसते खिलखिलाते घर से बाहर बाजार के लिए निकलती हैं। चलो आज सबके लिए कुछ अच्छा ले आते हैं। घर और भी प्यारा लगेगा। सासू मां के लिए भी कुछ लेना चाहिए। उन्हें बहुत खुशी होगी। वो सड़क पर साथ-साथ चलती हैं। हाथों में सब्जी की टोकरी, चेहरे पर खुशी और कुछ

औरतें दरवाजों पर खिड़कियों से झांकती हैं। इतनी हंसीखुशी तो नाटक ही लग रहा है। लगता है कमला के घर में सब बढ़िया है इसलिए ऐसे उड़ रही है। अरे छोड़ो। कुछ महीने बाद असली रूप देखेगा तब देखेंगे। सब जलन भरी नजरों से फुसफुसाती रहती हैं और बहुएं बिना परवाह किए आगे बढ़ती जाती हैं। अगले दिन सुबह की रसोई में तीनों बहुएं काम बांट रही होती हैं लेकिन आज माहौल थोड़ा अलग होता है। मैं कल भी बर्तन धो [संगीत] चुकी हूं। आज कोई और कर ले। तो क्या मैं कम कर रही हूं? रात का सारा खाना मैंने ही बनाया था। आप दोनों ही अपनी-अपनी बातें कर लो। मेरा काम

तो जैसे दिखता ही नहीं। तीनों की आवाज धीरे-धीरे तेज होने लगती है। रसोई का शांत माहौल तकरार में बदल जाता है। ड्राइंग रूम में कमला देवी और प्रिया बैठी बातें कर रही होती हैं। कमला देवी रसोई में आती आवाजों पर ध्यान देते हुए सिर पकड़ लेती है। देख प्रिया हो गई शुरुआत। [संगीत] मैंने कहा था ना बहुएं जैसे बाहर की पड़ोस में हो गई हैं। अब आपस में लड़ना शुरू [संगीत] कर दिया। मम्मी बस थोड़ी सी बहस है। हर घर में हो जाती है। आप इतना नेगेटिव मत सोचिए। तुझे नहीं पता बेटा आज एक दूसरे से लड़ रही हैं। कल [संगीत] मुझसे और तेरे पापा

से लड़ेंगी। धीरे-धीरे घर का सुकून खत्म हो जाएगा और हमारा घर भी पड़ोस जैसा बन जाएगा। मम्मी आपके दिमाग में नेगेटिविटी बहुत ज्यादा भर गई है। अगर आप भाबियों के बारे में ऐसे ही सोचोगी तो उनकी कोई अच्छाई दिखाई ही नहीं देगी। अच्छाई कहां है अच्छाई बेटा? [संगीत] झगड़ा करती है, उल्टा जवाब देती हैं। यह सब शुरुआत है। मम्मी वो नई है। कभी-कभी गलतफहमियां हो ही जाती हैं। आप उन्हें अपनाइए। उनकी अच्छाइयां खुद सामने आ जाएंगी। कमला देवी फिर रसोई की तरफ चिंतित नजरों से देखती हैं। अगले दिन सुबह रसोई में तीनों बहुएं फिर से एक टीम की तरह काम कर

रही होती हैं। कोई चपाती सेक रही है। कोई सब्जी पैक कर रही है। कोई नंद, ससुर और पतियों के टिफिन तैयार कर रही है। तीनों के बीच खुशी का माहौल रहता है। देखो, यह सब्जी भी [संगीत] पैक कर दो ना। हां हां मैं पराठे डाल देती हूं। कमला देवी दूर से यह सब देखकर मुस्कुराती हैं। शायद सच में मेरी बहुएं बहुत अच्छी हैं। [संगीत] काम भी मिलकर करती हैं और घर में शांति भी रहती है। उनका मन धीरे-धीरे खुश होने लगता है। अगले दिन दोपहर में कमला देवी और उनकी बेटी प्रिया ड्राइंग रूम में बैठी बातें कर रही होती हैं। बहुत दिन हो गए गाजर का हलवा खाए। बड़ा मन

[संगीत] कर रहा है। मैं कह दूंगी भाबियों को बना देंगी। इसी बीच बड़ी बहू मेघा किनारे से यह बात सुन लेती है। वह बिना समय गवाए बाकी दो बहुओं को बताती है। चलो मम्मी जी के लिए गाजर का हलवा बनाते हैं। उनका मूड भी अच्छा हो जाएगा। बिल्कुल अभी बनाती हैं। तीनों काम बांट लेती हैं। मेघा गाजर छीलती है। दिव्या गाजर कद्दूकस करती है और ज्योति मावा और घी में हलवा भूनती है। रसोई में मीठी खुशबू फैलने लगती है। तीनों की मेहनत और प्यार मिलकर एक शानदार स्वाद बन जाता है। तीनों बहुएं ट्रे लेकर आती हैं। अरे वाह भाभी मम्मी ने कल ही कहा था और आज

ही हलवा भी बन गया। कमला देवी के एक चम्मच खाती है और चेहरे पर खुशी की चमक आ जाती है। हम अच्छा ही बना है। प्रिया गर्व से मुस्कुराती है। बहुएं भी थोड़ा शर्मा जाती हैं। अभी तक तो सब ठीक है। [संगीत] आगे देखना क्या होता है। कमला के चेहरे पर हल्की चिंता और दिल से उम्मीद होती है। अगले दिन दोपहर का समय। तीनों बहुएं रसोई का काम निपटाकर सोफे पर बैठी आराम कर रही होती हैं। चाय के कप हाथों में होते हैं। मामी जी का रवैया हमारे साथ बिल्कुल [संगीत] ठीक नहीं है। पता नहीं क्यों वो ठीक से बात ही नहीं करती। ऐसे लगता है जैसे हम पर भरोसा ही नहीं है।

अरे थोड़ा टाइम लगता है ना [संगीत] खुलने में। अभी हम नई हैं। घर में उनके लिए भी यह सब नया है। हां, कोई बात नहीं। धीरे-धीरे देखना। वो हमसे अच्छे से बात करने लगेंगी। हम बस अपना प्यार और सम्मान बनाए रखें। हम शायद आप दोनों सही कह रही हो। हमारा फर्ज है कि हम सासू [संगीत] मां का दिल जीतें। अगले दिन सुबह तीनों बहुएं फुसफुसाते हुए प्रिया के लिए सरप्राइज की प्लानिंग करती हैं। आज प्रिया का जन्मदिन है। कुछ खास करना चाहिए। हां पड़ोस की सभी आंटी को भी बुलाते हैं। और खाना भी हम तीनों मिलकर बनाएंगे। बस काम बांट लेते हैं। वे रंग बिरंगी सजावट, गुब्बारे, केक सब

तैयार कर देते हैं। घर पूरी तरह पार्टी के माहौल में बदल जाता है। फिर शाम को पूरे मोहल्ले की औरतें आ चुकी होती हैं। प्रिया की आंखें खुशी से नम हो जाती हैं। इतनी खूबसूरत तैयारी। थैंक यू भाभी। आप हमारी प्यारी ननंद हैं। आपका दिन हम [संगीत] कैसे भूल सकते हैं? माहौल हंसीखुशी से भर जाता है। डेकोरेशन चमक रही होती है। सब खुश होते हैं। सभी मेहमान खाना खा रहे होते हैं। तीनों बहुएं मिलकर सर्व कर रही होती हैं। उन्हें देखकर पड़ोस की औरतों के अंदर आग जल उठती है। देखो कैसे तीनों मिलजुलकर काम कर रही हैं। कमला देवी की [संगीत] किस्मत तो देखो।

हमारे घर में होती तो अभी तक हाथापाई हो चुकी होती। मेरी बहूए सच में [संगीत] बहुत अच्छी है। घर भी संभालती और रिश्ते भी। अरे बहन मेरी बहू भी पहले ऐसी ही मेरी बेटी और मेरा जन्मदिन मनाती थी। फिर एक दिन अचानक बदले हुए रंग दिखा दिए। [संगीत] अब तो पूछती तक नहीं। उनके शब्दों में जलन और कड़वाहट साफ दिखती है। कमला देवी के चेहरे पर फिर एक पल की चिंता दौड़ जाती है। बस भगवान करे मेरे घर में ऐसा कुछ ना हो। अगले दिन सुबह गली में पड़ोस की कई बहुएं खड़ी होकर बातों में लगी होती हैं। उनके साथ कमला देवी की तीनों बहुएं भी खड़ी होकर हंसीज़ाक कर रही होती है। इसी दौरान

अचानक पास वाली दो बहुएं आपस में झगड़ना शुरू कर देती है। आवाज ऊंची हो जाती है। सबके घरों तक पहुंचती है। तू हर बात में टांगे उड़ा देती है। मेरी मासी तू कौन होती है समझाने वाली? लड़ते-लड़ते वह लगभग धक्कामुक्की पर उतर आती हैं। आवाज पूरे मोहल्ले में गूंजने लगती है। घर के अंदर बैठी कमला देवी को आवाज सुनाई देती है तो वह घबरा जाती है। अरे बाप रे आज तो इन्होंने तमाशा ही कर दिया। मम्मी इतनी हाइपर क्यों हो रही हो? पहले देख तो लो। क्या हो रहा है? अब मेरी इज्जत मिट्टी में मिल गई। लोग अब मेरे घर का नाम भी नहीं रहने देंगे। कहीं मेरी बहुएं भी

सबके जैसे निकली तो अब तो सब मेरे मुंह पर थू-थू करेंगे। वह सिर पर हाथ रखकर लगभग रोने लगती हैं। आखिरकार वह हिम्मत करके बाहर देखने जाती हैं। दरवाजा खोलते ही सामने सब दिख जाता है। सामने वाली शकुंतला की बहुएं लड़ रही होती हैं और कमला की तीनों बहुएं तो एक कोने में चुपचाप खड़ी होती हैं। कमला देवी एक लंबी राहत की सांस छोड़ती है। अच्छा यह लड़ रही हैं। उनके चेहरे पर सुकून लौट आता है। वो मुस्कुराते हुए अंदर लौटती हैं। अगले दिन सुबह-सुबह ही मोहल्ले की औरतें गली के कोने में खड़ी होकर बातें कर रही होती हैं। अरे भाभी हमारे मोहल्ले में जितनी भी

नई-नई बहुएं आई है ना सब की सब हाथ पैर टूटी पड़ी रहती हैं। किसी को तो चाय बनाना तक ढंग से नहीं आता। हां भाई और इस कमला [संगीत] की किस्मत देखो। एक नहीं पूरी तीन-तीन बहुएं ऊपर से तीनों काम में इतनी तेज जैसे कोई मशीन हो। सुबह-सुबह सबके घर पर उनकी चर्चा होती है। सच कह रही हो। मुझे तो अब इनसे जलन होने लगी है। मेरे घर की बहू तो दो रोटियां सिकने में भी पसीनापसीना हो जाती है। और इसे देखो तीनों बहुएं पहने लगती है। साथ हंसती है। साथ काम करती है। और ऊपर से कभी किसी को जवाब भी नहीं देती। [हंसी] जितनी सीधी बहुएं उतनी ही कमला भाभी की किस्मत चमक गई।

दूसरी तरफ कमला की तीनों बहुएं घर के बाहर पौधों में पानी डाल रही होती हैं। वो उन औरतों की बातें सुन लेती है और एक दूसरे की तरफ देखकर हल्की मुस्कान दे देती हैं। देखा दीदी हमारी तारीफ हो रही है। हां मगर चलन भी लगता है। हमने धमाल मचा रखा है। अरे हमारी क्या तारीफ? [संगीत] ये तो हमारी मम्मी जी के संस्कार हैं। तभी तो मोहल्ले में हम सबकी मिसाल दी जाती है। बहन अगर मेरी बहू भी इनकी तरह होती ना तो मैं रोज भगवान के मंदिर में प्रसाद चढ़ाती। हां भाभी पर कमला का नसीब है। सबको ऐसा सुख कहां मिलता है? तीनों बहुएं यह सुनकर बस मुस्कुराती रहती

हैं। अगले दिन सुबह रसोई में तीनों बहुएं मिलकर घर का काम कर रही होती हैं। मेघा सब्जियां काटती है। दिव्या दाल का तड़का लगाती है। ज्योति रोटियां बेल रही होती है। वह बीच-बीच में हंसीज़ाक भी कर रही होती हैं। काम बांटकर पूरे घर की जिम्मेदारी संभाल रही होती हैं। कमला देवी रसोई के दरवाजे से झांक रही होती है। आंखों में चिंता और मन में शक दिखता है। यह सब कुछ तो [संगीत] बहुत अच्छा कर रही हैं। लेकिन अब सोचो कहीं यह सब दिखावा तो नहीं। कल को कोई गलती करेगी, झगड़ा करेगी, [संगीत] फिर मेरा घर, मेरा नाम सबके सामने सब मुंह पर थूक देंगे। हाय भगवान अभी तो

यह सब [संगीत] ठीक कर रही हैं, लेकिन पता नहीं अच्छा है या बुरा समय है। प्रिया पास आती है और मां के पास बैठती है। मम्मी क्यों इतनी चिंता कर रही हो? देखो तो यह सब [संगीत] बहुएं सच में मिलकर काम कर रही हैं। आपको क्यों लगता है कि वो कुछ गलत करेंगी? लेकिन बेटा अभी तक सब [संगीत] ठीक है। आगे क्या होगा कोई नहीं जानता। अब की नई बहुएं उनकी सच्चाई पता नहीं। मम्मी अगर आप हमेशा नेगेटिव सोचोगी तो [संगीत] आप उनकी अच्छाई देख ही नहीं पाएंगी। आज ही तीनों मिलकर काम कर रही हैं। कल भी ऐसे ही करेंगी। आप बस उनका साथ दें, प्यार [संगीत] दें सब अच्छा होगा।

कमला देवी एक लंबी सांस लेती हैं। रसोई की ओर देखती हैं। तीनों बहुएं हंसते खिलखिलाते काम कर रही होती हैं। शायद प्रिया सही कह रही है। अब देखना यह मेरी बहुएं सच में कितनी अच्छी हैं। शाम के समय कमला देवी चिंतित चेहरा लिए हॉल में बैठी होती हैं। तभी प्रीतम जी और तीनों बेटे घर आते हैं। चेहरे पर तनाव आंखों में थकान साफ दिखती है। कहां रह गए थे सब? ऑफिस के टाइम से इतना लेट क्या हुआ? और क्यों सबके चेहरे उतरे हुए हैं? कोई भी जवाब नहीं देता। तीनों बेटे चुप होते हैं। नजरें झुकाए खड़े होते हैं। कमला बहुत बड़ा झटका लगा है। हमारी

कंपनी से पेमेंट आने वाले थे वो अटक गए हैं। पता नहीं कब मिलेंगे। क्या मतलब? और बच्चों की नौकरी सब ठीक है ना? मम्मी, हमारी नौकरियां भी चली गई है। कमला देवी के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। आंखों में डर दिखने लगता है। हे भगवान, अब क्या होगा? तीनों की [संगीत] नौकरी चली गई और ऊपर से पैसे भी अटक गए। अब हम घर कैसे चलाएंगे? क्या खाएंगे? मैं तो मर ही गई। प्रिया पानी लाती है और मां को संभालती है। ससुर बेटों की ओर देखते हैं। बेटा हिम्मत रखना सब ठीक होगा। बस थोड़ा समय लगेगा। लेकिन बहुओं को यह बात मत बताना। अगर उन्हें पता चल गया तो बस इस घर [संगीत]

में तूफान आ जाएगा। आजकल की बहुएं पैसे देकर ही प्यार करती है। कहीं मायके ना चली जाएं। मम्मी ऐसे क्यों सोचती हो? वो तीनों ऐसी नहीं है। यह मेरा फैसला है। बहुओं को कुछ मत बताना। अगली सुबह तीनों बहुएं रसोई में साथ काम कर रही होती हैं। लेकिन घर का माहौल तनाव से भरा होता है। आज सभी इतनी परेशान क्यों लग रहे हैं? हां, कल रात से ना तो ठीक से यह बात कर रही है और ना ही खाना खाया ठीक से। शायद ऑफिस में कोई दिक्कत है। चलो ऐसा करते हैं। चाय बनाकर ले चलते हैं। आराम से बैठकर बात करेंगी। वह चाय लेकर हॉल की ओर बढ़ती हैं। ज्योति दरवाजे के पास पहुंचती

है। कमला देवी और सभी बातचीत कर रहे होते हैं कि उनकी आवाज साफ सुनाई देती है। अगर बहुओं को पता चल गया ना कि [संगीत] घर में खाना खरीदने तक के पैसे नहीं है तो वो घर सिर पर उठा लेंगी। आजकल की बहुएं बुरे वक्त में साथ नहीं [संगीत] देती। कल को बैग उठाएंगी और मायके चली जाएंगी। ज्योति सुनते ही गुस्से से भर जाती है। उसका दिल टूट जाता है। आंखों में आंसू भर आते हैं। हम इतने दिनों [संगीत] से इस घर को अपना समझती रही और यह हमें क्या समझती है? कलेश करने वाली [संगीत] स्वार्थी बेदिल होती है। ज्योति बिना आवाज किए वापस रसोई में लौट

जाती है। दूसरी दोनों बहुओं को भी सारा सच बता देती है। अब तीनों के चेहरे पर अपमान और गुस्सा साफ दिखाई देता है। इतना साफ करने के बाद भी हमारी नियत पर शक किस लिए इतना सोचा? हम रोज मिलकर घर संभालते हैं। फिर भी हमें बाहर ही समझती है। तीनों चाय वहीं रख देती हैं और कमरे में चली जाती हैं। थोड़ी देर बाद सास, ससुर, नंद और बेटे नीचे आते हैं। तीनों बहुएं उनके सामने खड़ी होती है। चेहरे पर आंसू और गुस्सा दोनों दिखते हैं। क्या आप हमें अपनी बहुएं नहीं समझती? हमारे लिए आपका भरोसा कहीं है भी? ये क्या बोल रही हो बहू? मैंने क्या कर दिया?

मम्मी जी, इतनी बड़ी समस्या घर में है और आपको यह बताने में शर्म आई? क्योंकि आपको लगता है कि हम बुरे समय में साथ नहीं देंगे? हमने इस घर को खुद का घर माना है और आप हमें पड़ोस की बाकी बहुएं जैसा समझती हैं। कलेश करने वाली औरतें जैसी बातें करती हैं वैसी। प्रीतम आगे आते हैं और बहू को प्यार से समझाने की कोशिश करते हैं। बेटा मैं तो तुम्हें बताना चाहता था लेकिन तुम्हारी सास ने डर के कारण मना किया। कमला देवी को अपनी गलती समझ में आने लगती है और आंखें भर आती है। बुआ मुझे माफ कर दो। [संगीत] मुझे डर था कि तुम हमारा साथ छोड़ दोगी।

[हंसी] जब परिवार पर मुसीबत आती है तो बहुएं ही सबसे पहले ढाल बनकर खड़ी होती है। मम्मी जी। अगर बहुएं घर उजाड़ सकती है तो घर बचा भी सकती हैं। आपने हमें गलत समझा। यह बात हमें बहुत बुरी लगी। पापा जी आपको जमीन बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मेरे पास कुछ एफडी है। मैं दे दूंगी। और मेरे पास भी कुछ सेविंग्स हैं। हम सब मिलकर समय निकाल लेंगे। हम नौकरी भी ढूंढेंगे। घर-घर [संगीत] जाकर खाना बनाने का, टिफिन सर्वे शुरू करेंगे। थोड़ा-थोड़ा पैसा आएगा लेकिन हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। अरे तुम तीनों सच में बहुत खास हो। मम्मी मैंने कहा था ना मेरी भाभी बहुत

अच्छी हैं। कमला देवी तीनों बहुओं को अपने पास बुलाती हैं। आंखें भर आती है। कमला देवी गर्व से सिर उठा लेती हैं। अब उनकी बहुएं उनकी शान बन चुकी होती हैं। शायद मेरी ही सोच गलत थी। [संगीत] तुम तीनों मेरी शान हो। पड़ोस की औरतों ने मुझे भड़काया। मैंने तुम तीनों को गलत समझा। पर तुम सब ने मेरे [संगीत] घर को टूटने से बचा लिया। हम इस घर का हिस्सा हैं। मम्मी जी, आपकी बेटियां। कमला देवी रोते हुए तीनों बहुओं को गले लगाती हैं। अगले दिन पड़ोस की औरतें फुसफुसाते हुए बात कर रही होती हैं। देखो कमला को कैसी बहुएं मिली है उसे। हमारी बहुएं तो बस झगड़ा करती हैं।

[संगीत] और यह देखो घर भी बचाया और नाम भी बढ़ा दिया। मेरी बहू बहुत अच्छी है और मुझे इस बात पर बहुत गर्व है।