मां देख मोबाइल कैसा लग रहा है? मस्त है ना? पता है स्टोर में आते ही सबसे पहले किसने लिया? तेरे बेटे ने। है ना प्राउड की बात? अब तो देख कैसे सबको दिखा दिखा कर चलाता हूं मैं। क्या मजाक है? फिर मोबाइल? पिछले वाले का क्या हुआ? और कितने का है ये? पैसे कहां से आए? क्या पापा? जितने तो फोन में फीचर्स नहीं है उतने तो आपके सवाल है। कहां आ गया? दुकान से आया। फिर पैसे की क्या चिंता? पैसा कमा रहा है आपका बेटा। अरे प्लेसमेंट में सबसे अच्छी सैलरी मेरी लगी याद है ना? मां और बाप अनंत के फालतू के खर्चे से परेशान थे। लेकिन अनंत था कि उसे पैसों की
कदर तो छोड़ो। फालतू खर्चे का इतना शौक था कि क्या ही कहना। पापा देखो तो कैसी लग रही है। ब्रांड न्यू अभी-अभी शोरूम से निकाल के लाया हूं। स्टाइल देखो इसका। पूरी दिल्ली में ऐसी बाइक किसी के पास नहीं होगी। और सबसे बढ़िया बात। ईएमआई पे ली है। मतलब एक साथ पैसे भी नहीं देने पड़े। क्या बकवास है ये अननंद। अभी परसों ही मोबाइल लिया था बाइक। तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या? नौकरी लगी नहीं, सैलरी आनी शुरू नहीं हुई और तुम ईएमआई पे बाइक ले आए। कैसे भरोगे किस्ते? हवा में उड़ रहे हो तुम जमीन पे आओ थोड़ा। अरे पापा आप भी ना बस चिंता ही करते रहते हो। अरे
प्लेसमेंट में तो मेरी सबसे अच्छी सैलरी लगी थी। याद है? अगले महीने से सैलरी आनी शुरू हो जाएगी। फिर तो मजे ही मजे हैं। और देखो ना दिल्ली में बिना गाड़ी के कैसे चलेगा? मेट्रो में धक्के खाते-खाते कब तक अरे यार अब तो मैं कमाने वाला हूं। को थोड़ा एंजॉय करने दो ना। एंजॉय एंजॉय करोगे तुम। पहले जिम्मेदारी समझो। घर में खर्चे हैं। तुम्हारी बहन की पढ़ाई है। लेकिन नहीं तुम्हें तो बस दिखावा करना है। लोगों को जलाना है। ये सब फालतू के शौक छोड़ो अनंत नहीं तो एक दिन बहुत पछताओगे। पापा प्लीज आप ना हमेशा लेक्चर देते रहते हो। अरे मैं समझदार हूं। सब
संभाल लूंगा। बेकार में टेंशन ले रहे हो। फिर एक रोज़। चलो यार आज पार्टी मेरी तरफ से है। अभी-अभी बाइक ली है ना तो सेलिब्रेशन तो बनता है। चलो कनोट प्लेस चलते हैं। वहां नया रेस्टोरेंट खुला है। अरे वाह भाई तू तो कमाल का है यार। हम तो सोच ही रहे थे आज कहां घूमे हैं। तेरी वजह से मजा आ गया। हां यार आनंद तू आज तो सब सेट है। वैसे तो तेरे पास अब इतनी सैलरी आने वाली है तो हम गरीबों का तो खर्चा बचा ही देगा तू। अरे कोई बात नहीं यार दोस्त हो तुम लोग। और फिर मैं तो कमाने लगा हूं ना। क्या फर्क पड़ता है? आज मूवी भी देखते हैं और
फिर डिनर करते हैं। अरे हां और सुन कल ना मेरा पेट्रोल खत्म हो गया था। तूने भरवा दिया था। याद है ना? बड़ा भाई है तू हमारा। अरे यार जो तूने पिछली बार सबको ट्रीट दी थी ना क्या मजा आया था। आज फिर वैसे ही कुछ प्लान बनाता है ना। हां हां बिल्कुल चलो निकलते हैं। आज धूम मचा दे। पैसा तो आता जाता रहता है। एंजॉय करना जरूरी है। आनंद बेटा जरा इधर आना। मॉम हो क्या हुआ? बोलो बेटा मुझे कुछ दिनों से बहुत कमजोरी लग रही है। चक्कर भी आ रहा है। डॉक्टर के पास जाना है और कुछ टेस्ट भी करवाना है। तुम्हारे पापा से मांगो तो उनके पास भी ज्यादा पैसे नहीं है इस महीने। तुम दे
सकती हो कुछ मां अभी अभी तो मेरे पास भी नहीं है। सैलरी आई थी ना। लेकिन पूरी की पूरी ईएमआई में चली गई। मोबाइल की किस्त, बाइक की किस्त, क्रेडिट कार्ड का बिल सब मिलाकर कुछ बचा ही नहीं। लेकिन बेटा मैं बीमार हूं। टेस्ट करवाने जरूरी है। डॉक्टर ने कहा है कि देरी मत करना। अरे मां तुम फिक्र मत करो कुछ नहीं होगा। बस थोड़ी कमजोरी है। आराम कर लो। और घर पर ही दवाई ले लो कोई। देखो मुझे ना अभी निकलना है। दोस्तों से मिलना है। अगले महीने सैलरी आएगी तो देख लेंगे। हां। पर बेटा मां प्लीज अभी मेरे पास टाइम नहीं है। लेट हो रहा हूं। बाद में बात करते हैं। बाय। मैं
चुपचाप बैठी रह गई। आंखों में आंसू थे। लेकिन अनंत को इसकी कोई परवाह नहीं थी। क्या हुआ? रो क्यों रही हो? कुछ बताओगी भी? नहीं कुछ नहीं ऐसे ही। ऐसे ही मतलब मैं तुम्हें इतने सालों से जानता हूं। बताओ क्या बात है? तबीयत की वजह से परेशान हो क्या? हां और नहीं तो क्या? मुझे डॉक्टर के पास जाना था, टेस्ट करवाने थे। आनंद से पैसे मांगे लेकिन उसने साफ मना कर दिया। बोला सारी सैलरी ईएमआई में चली गई। अब मैं क्या करूं? आपके पास भी तो इस महीने ज्यादा नहीं है। यह लड़का मैं तो पहले से कह रहा था लेकिन सुनता ही नहीं है। अपनी मां बीमार है और
इसे अपनी बाइक और मोबाइल की फिक्र है। कैसा बेटा ये? आंखों में आंसू आ गए बहरो के। आप उसे कुछ मत कहना। आखिर हमारा बेटा है। बड़ा हो गया है। उसकी भी अपनी जिंदगी है। हम बूढ़े हो गए हैं। अब हमें ही समझना पड़ेगा। नहीं यह गलत है। बेटा बुढ़ापे का सहारा होता है। हमने उसे इतना बड़ा किया, पढ़ाया, लिखाया, अपनी जरूरतें छोड़ दी। और आज जब हमें उसकी जरूरत है तो वो मुंह मोड़ रहा है। यह तो बहुत गलत है। लेकिन हम कह रहे तो क्या करें उससे लड़े, झगड़ा करें, नहीं ना। वो तो और दूर हो जाएगा बेटा है हमारा एक दिन समझ जाएगा। कब समझेगा? जब हम
इस दुनिया में नहीं रहेंगे तब। नहीं। मुझे उससे बात करनी पड़ेगी। अब बहुत हो गया। तुम्हारा इलाज जरूरी है। मैं कहीं से पैसे का इंतजाम कर लूंगा। लेकिन आनंद को भी समझाना पड़ेगा वरना यह लड़का पूरी तरह बिगड़ जाएगा। दोनों परेशान बैठे होते हैं कि एक दिन पिता को एक आईडिया आता है। वो अनंत की मां के पास जाता है और सुनो मैं एक बात सोच रहा हूं। अनंत की शादी करवा दे तो शायद शादी के बाद जिम्मेदारी आ जाए। बीवी बच्चे हो जाए तो समझ आ जाएगी उसे। हां मैं भी यही सोच रही थी। अभी तो बिल्कुल अकेला है। कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है। जो मन में आए वो करता है। लेकिन
शादी हो जाए तो घर बसाने की सोचेगा। फिर पत्नी समझाएगी उसे और बच्चे होंगे तो और जिम्मेदार हो जाएगा। बिल्कुल। उम्र भी हो गई है उसकी नौकरी भी लग गई है। अब शादी का सही समय है। मैं कल से ही लड़की देखना शुरू करता हूं। कोई अच्छा सा रिश्ता ढूंढते हैं। हां और एक अच्छी समझदार बहू आ जाएगी ना तो घर में मुझे भी सहारा मिल जाएगा। वो आनंद को संभाल लेगी। उसे समझा देगी कि परिवार की जिम्मेदारी क्या होती है। चलो फिर तैयार रहा। कल से ही रिश्ते ढूंढना शुरू करते हैं। देखते हैं शादी के बाद कितना बदलता है हमारा बेटा। सुनो मैंने शर्मा जी से बात की थी उनकी
बेटी प्रिया के बारे में। बहुत अच्छी लड़की है। पढ़ी लिखी है। घर का काम भी संभालती है और स्वभाव से बहुत शांत और समझदार है। हां, मैंने भी सुना है बहुत सुशील लड़की है। मैं कल उनके घर जाऊंगी। लड़के से मिलूंगी और सब ठीक रहा तो रिश्ता पक्का कर लेते हैं। अरे पापा इतनी जल्दी क्या है? अभी तो मैंने नौकरी शुरू की है। थोड़ा एंजॉय कर लो फिर सोचेंगे शादी की। नहीं अब और नहीं। तुम्हारी उम्र हो गई है बेटा और अच्छा रिश्ता मिल रहा है। शर्मा जी के घर की हैसियत भी अच्छी है। उन्हें तुम्हारी नौकरी और हमारा घर देखकर बहुत पसंद आया। तो बस अब यह शादी होगी।
कुछ महीनों बाद धूमधाम से आनंद की शादी हो गई। प्रिया घर में आई तो पूरा माहौल ही बदल गया। वो सुबह जल्दी उठती, घर का सारा काम संभालती, सास की सेवा करती। मम्मी जी आप बैठिए मैं चाय बना देती हूं। आपकी दवाई का टाइम भी हो गया है ना? बेटा, तुम आ गई तो मेरी तो जिंदगी ही बदल गई। कितना ख्याल रखती हो तुम मेरा। अरे मम्मी जी, यह तो मेरा फर्ज है। आप मेरी मां जैसी हैं। एक दिन प्रिया ने अनंत के कमरे में नया मोबाइल और शॉपिंग के बैग देखे। सुनो, यह सब क्या है? फिर से नया मोबाइल और इतनी शॉपिंग। अभी तो महीना खत्म भी नहीं हुआ। अरे तो क्या हुआ? पसंद आ गया तो ले लिया।
तुम्हें क्या दिक्कत है? दिक्कत यह है कि घर में खर्चे हैं। मम्मी जी बीमार है। उनका इलाज चल रहा है और तुम फिजूल खर्ची कर रहे हो। देखो प्रिया तुम मेरे मम्मी पापा की तरह लेक्चर मत दो। मैं अपने पैसे से जो चाहूं वो करूं। ये मेरी मर्जी है। तुम बीच में मत आओ। अरे लेकिन मैं गलत थोड़ी ना कह रही हूं। घर की जिम्मेदारी है। अरे बस करो। मुझे नहीं सुननी तुम्हारी बातें। मैं समझदार हूं। मुझे पता है मुझे क्या करना है। तुम अपना काम करो। कुछ दिन बाद प्रिया ने हिम्मत करके फिर बात की। सुनो मुझे किचन के लिए कुछ चीजें चाहिए। मिक्सचर खराब हो गया है। कुछ बर्तन
भी लेना है। दो-तीन हजार लग जाएंगे। अरे नहीं नहीं अभी नहीं अगले महीने देख लेंगे। अभी मेरे पास पैसा नहीं है। कैसे? अभी तो सैलरी आई थी। और ये जरूरी चीजें हैं घर के लिए। अरे बोला ना अभी नहीं यार। सारे पैसे ईएमआई में चले गए। क्रेडिट कार्ड का बिल भी आ गया था। कुछ बचा ही नहीं है। तो ईएमआई किस-किस चीज की भर रहे हो तुम? इतना सब कहां खर्च हो रहा है? तुम्हे क्या मतलब? मैं अपने पैसों का हिसाब तुम्हे क्यों दूं? चुपचाप घर का काम करो। कुछ दिन बाद फिर मुझे कुछ कपड़े चाहिए। शादी में जाना है और सर्दी भी आ रही है। दो-तीन कुर्ते ले लूंगी।
अरे नहीं नहीं अभी नहीं। पहले वाले पहन लो। नया की क्या जरूरत है? हर महीने कुछ ना कुछ चाहिए तुम्हें। लेकिन तुम तो हर हफ्ते कुछ ना कुछ लेकर आते हो ना नया। अपने लिए। तो मेरे लिए कुछ नहीं। अरे बस करो प्रिया यार मेरा दिमाग मत खाओ तुम्हारे पास सब कुछ है फालतू की डिमांड मत करो बेटा तुम रो क्यों रही हो क्या हुआ बताओ मुझे कुछ नहीं मम्मी जी ऐसी आंखों में आंसू भर आए प्रिया के मुझसे क्या छुपाना बेटा मैं सब समझ रही हूं अनंत ने फिर से मना कर दिया ना तुम्हारी कोई जरूरत पूरी नहीं की मैं जानती हूं वो कैसा है मैंने बहुत गलती की बेटा मैंने ही तो कहा था
तुम्हारे पापा से कि अनंत की शादी करवा दो शादी के बाद सुधर जाएगा। लेकिन नहीं वो तो और बिगड़ता जा रहा है। मैं ना तुम्हारी जिंदगी बर्बाद कर दी माफ कर दो मुझे। नहीं मम्मी जी ऐसा मत कहिए। आप तो मेरी मां जैसी। आपकी कोई गलती नहीं है। आपने सोचा था शादी के बाद वो जिम्मेदार हो जाएगा ये तो सबकी सोच थी। लेकिन बेटा तुम परेशान हो। तुम्हारी छोटी-छोटी जरूरतें भी पूरी नहीं हो रही है और वो बस अपनी मौज मस्ती में लगा रहता है। अपने दोस्तों पर पैसे उड़ाता है। नए-नए शौक पूरे करता है लेकिन अपनी पत्नी अपने मां-बाप का ख्याल तक नहीं। मुझे बहुत दुख होता है ये सब देखकर।
मम्मी जी आप मत रोइए। हम हार नहीं मानेंगे। हमें मिलकर अनंत को सुधारना होगा। उसे समझाना होगा। अभी वो समझ नहीं रहा। लेकिन एक ना एक दिन जरूर समझेगा। हम तीनों मिलकर कोशिश करेंगे। आप पापा जी और मैं हम हार नहीं मानेंगे। लेकिन बेटा कैसे है वो तो किसी की सुन पाई ही नहीं। कुछ समय गुजरता है और अनंत पिता बनता है। फिर एक रोज सुनो बच्चा भूख से रो रहा है। बेबी फूड खत्म हो गया है और डायपर भी लेना है। कुछ पैसे दो ना। अरे अभी कहां से दूं? मेरे पास में आ। कैसे नहीं है? कल ही तो सैलरी आई थी। और बच्चे की जरूरत है। ये वो भूखा है, रो रहा
है। तुम्हें सुनाई नहीं दे रहा क्या? अरे पर सब पैसे चले गए। ईएमआई बिल सब भर दिए। अब क्या करूं मैं? तो अपने बच्चे से ज्यादा जरूरी है तुम्हें अपना मोबाइल, अपनी बाइक। शर्म नहीं आती तुम्हें? प्रिया बच्चे को सुलाकर कमरे में आई तो देखा अनंत उसके पर्स में हाथ डाले खड़ा था। ये क्या कर रहे हो? मेरे पर्स में हाथ क्यों डाला? वो मुझे कुछ पैसे चाहिए थे। सोचा तुम्हारे पास हो तो। पैसे किस लिए? कल ही तो सैलरी आई थी ना तुम्हारी। कहां गए सब पैसे? अरे वो दोस्तों को पार्टी देनी है। मैं पिता बना हूं तो सेलिब्रेशन तो बनता है ना। सब
बुला रहे हैं। आज शाम को प्लान है। क्या पार्टी? और ये पैसे? ये पैसे बेबी के बेबी फूड के लिए मैंने बचा बचा कर रखे हैं। कल लेने जाना है। छोड़ना मत इन्हें। अरे बस ₹3000 दे दो। फिर अगले महीने वापस कर दूंगा। दोस्तों के सामने बेइज्जत तो नहीं हो सकता मैं। नहीं बिल्कुल नहीं। तुम्हारा बच्चा भूखा रहेगा और तुम पार्टी दोगे। यह नहीं हो सकता। रख दो वापस पैसे। देखो प्रिया मुझे जाना है। दोस्तों से वादा कर चुका हूं। तुम समझो ना यार। मैं कुछ नहीं समझूंगी। यह पैसे तुम नहीं ले जा सकते। लेकिन अनंत ने उसकी एक ना सुनी। पैसे लेकर घर से निकल गया। प्रिया वहीं
खड़ी रोती रह गई। अनंत बेटा जरा उठो। मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है। हां पापा बोलो। क्या बात है? बेटा तुम्हें पता है ना अगले महीने मेरी रिटायरमेंट हो रही है। अब नौकरी नहीं रहेगी बस पेंशन आएगी और वह भी बहुत ज्यादा नहीं। घर का राशन पानी चल जाएगा उससे बस। हां तो मैं तो कमा रहा हूं ना पापा। हां बेटा इसीलिए कह रहा हूं कि अब घर की पूरी जिम्मेदारी तुम्हारे कंधों पर आ जाएगी। तुम्हारी मां की दवाइयां, घर का खर्चा, बच्चे की जरूरतें सब कुछ। इसलिए अब तुम्हें समझदारी से पैसे खर्च करने होंगे। फालतू खर्चे बंद करने होंगे। ईएमआई कम
करनी होगी। समझे बेटा? हां हां पापा समझ गया। आप फिक्र मत करो। मैं सब संभालूंगा। बेटा मैं सीरियस हूं। देखो अब मैं तुम्हारी मदद नहीं कर पाऊंगा। टेंशन तो बस हमारे खाने पीने में ही खत्म हो जाएगी। बाकी सब तुम्हें ही देखना होगा। प्रिया और बच्चे का ख्याल रखना होगा। जी पापा मैं समझ गया। अब टेंशन मत लो। अगले दिन शाम को आनंद घर आया तो हाथ में एक बड़ा सा बॉक्स था। यह क्या लाए हो बेटा? अरे देखो तो ब्रांडेड वॉच है। कितनी शानदार है। ऑफर में मिल रही थी। सोचा ले ही लूं। देखो कितनी स्टाइलिश लग रही है मुझ पर। क्या घड़ी कल ही तो मैंने तुमसे
कहा था समझदारी से पैसे खर्च करो और तुमने फिर से कितना किया गया? बस ₹15,000 की। ईएमआई पे ले ली। कोई बड़ी बात नहीं है। 15,000 और ईएमआई। तुम्हारा दिमाग काम भी करता है क्या? कल ही तो बात हुई थी। एक दिन भी नहीं हुआ और तुम्हें फिर से अरे पापा आप बिना बस चिल्लाते रहते हो कमा रहा हूं ना मेरी मर्जी अनंत का यही हाल चलता रहा एक रोज हारकर प्रिया घर वालों से कहती है कि वो नौकरी करेगी सभी मान जाते हैं और प्रिया घर चलाने के लिए नौकरी करने लगती है फिर एक रोज रात के 10:00 बज रहे थे एक कार आकर घर के बाहर रुकी प्रिया उतरी उसके बॉस ने कार से उतर कर कहा
प्रिया इतनी रात हो गई है अगली बार थोड़ा जल्दी निकलने की कोशिश करना टेक केयर थैंक यू सर गुड नाइट अनंत अनंत खिड़की से ये सब देख रहा था। प्रिया अंदर आई तो अनंत गुस्से से चिल्लाया। क्या था ये? कौन था वो? इतनी रात को तुम्हें छोड़ने आया था। क्या चल रहा है ये? अरे वो मेरे बॉस थे। ऑफिस से छोड़ने आए थे। काम में लेट हो गया था। बॉस हर रोज इतनी रात को घर आती हो और अब बॉस भी छोड़ने आने लगे। लोग क्या कहेंगे? लो। लोग क्या कहेंगे तुम्हें इसकी फिक्रें? मुझे रात को अकेले कैसे आना चाहिए था। बस में, ऑटो में? इतनी रात को सर ने ऑफर किया तो
मैं आ गई। इसमें गलत क्या है? तुम्हें इतनी रात तक काम करने की जरूरत ही क्या है? छोड़ दो नौकरी। छोड़ दूं। वाह। और फिर क्या तुम्हारे भरोसे बैठूं? तुमसे तो बच्चे के बेबी फूड के पैसे तक नहीं मिलते। तुम तो अपने शौक पूरे करने में लगे रहते हो। ईएमआई भरते रहते हो। दोस्तों को पार्टी देते रहते हो। घर की कोई जिम्मेदारी नहीं। मैं कमा रहा हूं। हां, कमा रहे हो लेकिन घर में तो एक पैसा नहीं देते। मुझे नौकरी करनी पड़ती है। सारा दिन अपने छोटे से बच्चे से दूर रहना पड़ता है। तुम्हें पता है मुझ पर क्या बीतती है? मैं भी मां हूं। मेरा भी
दिल करता है बच्चे के साथ रहूं लेकिन नहीं। क्योंकि तुम्हारी वजह से मुझे काम करना पड़ता है। घर चलाना पड़ता है। रात के 2:00 बजे थे। बच्चा तेज बुखार से तड़प रहा था। रो रहा था लगातार। इसे डॉक्टर के पास ले जाना होगा। बुखार बहुत तेज है। देखो कैसे तड़प रहा है। हां, मैं गाड़ी निकालता हूं। चलो। तीनों अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर ने जांच की। बच्चे को वायरल इनफेक्शन है एडमिट करना पड़ेगा कम से कम दो दिन और एडवांस में 15,000 जमा करा देना। जी ठीक है डॉक्टर मैं अभी पेमेंट करता हूं। अनंत ने अपना वॉलेट निकाला सिर्फ 2000 थे। उसने कार्ड निकाला लेकिन लिमिट
खत्म हो चुकी थी। प्रिया तुम्हारे पास कुछ है क्या? मेरे पास सिर्फ 3000 है। सैलरी आने में अभी 5 दिन बाकी है। अनंत घबरा गया। उसने झट से रोहन को फोन किया। या रोहन मुझे अर्जेंट 15,000 चाहिए। बच्चा बीमार है। अस्पताल में एडमिट करना है प्लीज भाई। अरे यार अभी तो मेरे पास नहीं है। इस महीने खुद टाइट हूं। सॉरी हां किसी और से मांग ले हां। यार प्लीज तू तो मेरा दोस्त है। मैंने तुझे कितनी बार अरे भाई समझना नहीं है अभी बाद में दे दूंगा। बाय। फोन कट गया। अनंत ने विकास को फोन किया। वो भी मना कर गया। किसी ने नहीं सुनी। अनंत की आंखें भर आई। वह बाहर बेंच
पर बैठ गया। हाथों में सिर लेकर उसे याद आया कैसे उसने इन्हीं दोस्तों पर लाखों खर्च किए थे। हर बार पार्टी, हर बार खर्चा और आज जरूरत में किसी ने साथ नहीं दिया। उसे अपनी मां की वह बात याद आई जब वह बीमार थी और उसने पैसे मांगे थे। उसने मना कर दिया था। उसे प्रिया के आंसू याद आ गए जब उसने बच्चे के बेबी फूड के पैसे नहीं दिए थे। उसे पिता की वह नसीहत याद आई जो उन्होंने रिटायरमेंट से पहले दी थी। अनंत अंदर गया। पिता भैरव वहां खड़े थे। क्या हुआ? पेमेंट हो गया। पापा मेरे पास पैसे नहीं है। दोस्तों ने भी मना कर दिया। मैं मैं क्या करूं मेरा
बच्चा? आनंद फूट-फूट कर रोने लगा। पिता भैरव ने अपनी जेब से एक लिफाफा निकाला। ये लो। मैंने अपनी पेंशन से बचा बचा कर रखे थे। किसी इमरजेंसी के लिए ले जाओ जमा कर दो। अनंत ने पिता के पैर पकड़ लिए। पापा मुझे माफ कर दो। मैं बहुत गलत था। मैंने आप सबके साथ कितना बुरा किया। मम्मी के साथ, प्रिया के साथ, अपनी बच्ची के साथ मैं कितना स्वार्थी था। मैं सुधर जाऊंगा पापा। अब नहीं अब कभी नहीं। 3 महीने बाद घर में खुशी का माहौल था। अनंत ने अपनी बाइक बेच दी थी। महंगा मोबाइल भी सारी ईएमआई बंद करवा दी थी। अब वह घर में पैसे देता था। प्रिया ने नौकरी छोड़ दी थी और
बच्चे के साथ रहती थी। मम्मी ये लो आपकी दवाइयां और प्रिया ये तुम्हारे लिए साड़ी तुम्हारी सारी साड़ी बहुत पुरानी हो गई है। अरे इसकी क्या जरूरत थी? जरूरत थी। तुमने मेरे लिए बहुत कुछ सहा है। अब मैं तुम्हारा ख्याल रखूंगा हमेशा। बेटा भैरव मुस्कुरा रहे थे। उनका बेटा आखिरकार समझदार हो गया था। घर में फिर से खुशियां लौट आई थी। अनंत को अपनी गलतियों का एहसास हो गया था और अब वो एक जिम्मेदार बेटा, एक अच्छा पति और एक प्यारा पिता बन गया
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